फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली : परीक्षा केंद्रों पर प्रश्न पत्र लीक कराने वाले गैंग का भंडाफोड़, महिला सरगना समेत चार गिरफ्तार

Sat, 20 Mar 2021 02:22 AM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
विज्ञापन
प्रश्न पत्र लीक कराकर सरकारी नौकरी दिलाने वाले एक गैंग का नारायणा थाना पुलिस ने भंडाफोड़ किया है - फोटो : ANI
विज्ञापन

प्रतियोगी परीक्षाओं का प्रश्न पत्र लीक कराकर सरकारी नौकरी दिलाने वाले एक गैंग का नारायणा थाना पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गैंग की महिला सरगना समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने पूछताछ में बताया कि वह सरकारी नौकरी दिलाने के एवज में बेरोजगारों से 15 से 25 लाख रुपये लेते थे। वह एक फर्जी परीक्षार्थी को केंद्र में भेजकर एप के जरिए प्रश्न पत्र लीक कराते थे। इसके बाद उसे हल करते थे और आंसर-की उन परीक्षार्थियों को भेजते थे जिनसे यह रुपये लेते थे। इस काम में उनकी मदद परीक्षा केंद्र पर तैनात कर्मचारी करते थे। बेरोजगारों को अपने जाल में फंसाने के लिए गिरोह की सरगना खुद को आईपीएस अधिकारी बताती थी।

विज्ञापन


पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त उर्विजा गोयल ने बताया कि नारायणा इलाके में निजी केंद्रों पर परीक्षाएं होती हैं। इसलिए नारायणा थाने की एक टीम गठित की गई। 4 मार्च को नारायणा में स्थित ओम और चंदर एसोसिएट केंद्र पर वन रक्षक पद के लिए परीक्षा हुई थी। यहां से पुलिस को फर्जीवाड़े की सूचना मिली। पुलिस ने वहां से एक परीक्षार्थी रोहित निवासी जवाहर नगर, सोनीपत (हरियाणा) को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से मिले मोबाइल की जांच की तो उसे गैंग की परत खुलती चली गई।

पुलिस के मुताबिक, उसके व्हाट्सएप डाटा का विश्लेषण कर गांव बिधौली, सोनीपत निवासी वैैशाली, लव कुमार और बहादुरगढ, झज्जर निवासी हिमांशु को दिल्ली व हरियाणा से गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि वैशाली गैंग की सरगना है। वह अपने दोस्त अनिल शर्मा, भाई लव और अन्य साथियों के साथ मिलकर सरकारी नौकरियों के लिए ऑनलाइन परीक्षाओं का रैैकेट चलाती थी। आरोपियों के घर से दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर और हवलदार की वर्दी मिली है। पुलिस को इनके बैंक खातों से करोड़ों रुपये के लेन-देन का पता चला है।

विज्ञापन

सहयोगी बनते थे फर्जी सब इंस्पेक्टर और हवलदार...

अपने इलाके में लोगों को प्रभावित करने के लिए वैशाली खुद को आईपीएस अधिकारी बताती थी। वह अपने दो सहयोगियों को सब इंस्पेक्टर और हवलदार बनाकर साथ रखती थी। आरोपी पुलिस की वर्दी पहनकर बेरोजगार युवकों से मिलते थे, ताकि उन्हें विश्वास हो सके कि उनकी ऊंची पहुंच है। यह गैंग हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बेरोजगारों से रुपये ऐंठता था।
परीक्षा केंद्रों के कर्मचारियों की मिलीभगत से देते थे वारदात को अंजाम

जांच में पता चला कि गैंग प्रश्न पत्र लीक करने के लिए निजी परीक्षा केंद्रों के कर्मचारियों से मिलीभगत करते थे और नकली परीक्षार्थियों को केंद्र में मोबाइल के साथ अंदर भिजवा देते थे। नकली परीक्षार्थी मोबाइल में मौजूद एक एप के जरिए प्रश्न पत्र को गैंग के सरगना के पास भेज देता था। कुछ ही देर में प्रश्न को हल कर उसे देश के विभिन्न राज्यों में मौैैजूद परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों के पास भेज दिया जाता था। परीक्षा केंद्र पर मौजूद कर्मचारियों के मार्फत अपने उम्मीदवारों के पास प्रश्नों का हल भिजवा देते थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिन निजी केंद्रों पर परीक्षा होती थी, उनके मालिक भी जांच के दायरे में हैं।
विज्ञापन

आरोपियों के पास से बरामद हुए फोन व अन्य दस्तावेज...

आरोपी व्यक्तियों के मोबाइल फोन, जिनमें विभिन्न उम्मीदवारों से संबंधित कई सामग्रियों और विभिन्न परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, भिवानी के चौधरी बंशीलाल विश्वविद्यालय के कर्मचारी व चपरासी के पदों के 17 आवेदन, आवेदनकर्ता के आधार कार्ड, पेन कार्ड और एडमिट कार्ड, पुलिस की वर्दी, प्रतीक चिह्न मिला है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें