अपने इलाके में लोगों को प्रभावित करने के लिए वैशाली खुद को आईपीएस अधिकारी बताती थी। वह अपने दो सहयोगियों को सब इंस्पेक्टर और हवलदार बनाकर साथ रखती थी। आरोपी पुलिस की वर्दी पहनकर बेरोजगार युवकों से मिलते थे, ताकि उन्हें विश्वास हो सके कि उनकी ऊंची पहुंच है। यह गैंग हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बेरोजगारों से रुपये ऐंठता था।
परीक्षा केंद्रों के कर्मचारियों की मिलीभगत से देते थे वारदात को अंजाम
जांच में पता चला कि गैंग प्रश्न पत्र लीक करने के लिए निजी परीक्षा केंद्रों के कर्मचारियों से मिलीभगत करते थे और नकली परीक्षार्थियों को केंद्र में मोबाइल के साथ अंदर भिजवा देते थे। नकली परीक्षार्थी मोबाइल में मौजूद एक एप के जरिए प्रश्न पत्र को गैंग के सरगना के पास भेज देता था। कुछ ही देर में प्रश्न को हल कर उसे देश के विभिन्न राज्यों में मौैैजूद परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों के पास भेज दिया जाता था। परीक्षा केंद्र पर मौजूद कर्मचारियों के मार्फत अपने उम्मीदवारों के पास प्रश्नों का हल भिजवा देते थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिन निजी केंद्रों पर परीक्षा होती थी, उनके मालिक भी जांच के दायरे में हैं।
आरोपी व्यक्तियों के मोबाइल फोन, जिनमें विभिन्न उम्मीदवारों से संबंधित कई सामग्रियों और विभिन्न परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, भिवानी के चौधरी बंशीलाल विश्वविद्यालय के कर्मचारी व चपरासी के पदों के 17 आवेदन, आवेदनकर्ता के आधार कार्ड, पेन कार्ड और एडमिट कार्ड, पुलिस की वर्दी, प्रतीक चिह्न मिला है।