नम आंखों से शीला को अंतिम विदाई
नई दिल्ली। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री व दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित को रविवार दोपहर नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। करीब साढ़े तीन बजे यमुना किनारे निगमबोध घाट स्थित सीएनजी शवदाह गृह में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। शीला दीक्षित (81) का शनिवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था।
दिल्ली की शिल्पकार कही जाने वालीं शीला दीक्षित को अंतिम विदाई देने के लिए दिल्ली के तमाम नेताओं का जमावड़ा लगा रहा। शीला दीक्षित की लोकप्रियता ही थी की आम और खास सभी उनकी अंतिम विदाई में शरीक हुए। अंतिम संस्कार के दौरान बारिश में भी उनके चाहने वाले निगम बोध घाट पर जमे रहे। चर्चा यही थी कि भगवान इंद्र भी स्नेह की बारिश कर रहे हैं। दोपहर करीब तीन बजे उनकी पार्थिव देह निगम बोध घाट पहुंची। यहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी समेत कई नेताओं ने शीला को श्रद्धांजलि दी। इससे पहले उनके पार्थिव शरीर को निजामुद्दीन स्थित आवास से अकबर रोड स्थित कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय लाया गया। यहां उनकी आखिरी झलक पाने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणब मुखर्जी, अहमद पटेल, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, कपिल सिब्बल, सचिन पायलट ने शीला की पार्थिव देह पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया।
यमुनोत्री में विसर्जित की जाएंगी अस्थियां
शीला दीक्षित की अस्थियों का विसर्जन यमुनोत्री में किया जाएगा। परिजन सोमवार को अस्थियां लेने निगम बोध घाट जाएंगे। दीक्षित के करीबी परवेज ने बताया कि अस्थि कलश को लेकर दो दिन बाद यमुनोत्री जाएंगे। शीला दीक्षित के पति विनोद दीक्षित की अस्थियों का विसर्जन भी यमुनोत्री में किया गया था।
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शीला दीक्षित अमर रहे... से गूंजा माहौल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पार्थिव शरीर को जैसे ही अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय लाया गया, वहां मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने ‘जब तक सूरज चांद रहेगा शीला तेरा नाम रहेगा’ शील दीक्षित अमर रहे...के नारों से आसमान को गुंजायमान कर दिया। पार्थिव शरीर को फूल-मालाओं से सजाकर रथ पर यहां लाया गया। रथ पर लगी उनके मुस्कुराते हुए चेहरे वाली तस्वीर को देखकर ऐसा लग रहा था कि अंतिम यात्रा पर निकलने वाली दीक्षित सभी का सह्दय से अभिवादन स्वीकार रही हो। शीला के सम्मान में शोकस्वरूप दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के दफ्तर पर पार्टी का ध्वज आधा झुका रहा।
कांग्रेस मुख्यालय में पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शनार्थ रखा गया। यहां श्रद्धांजलि देने वालों का ताता लगा रहा। सभी ने नम आंखों से पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद हल्की बारिश के बीच पार्थिव शरीर को राजीव भवन स्थित प्रदेश कार्यालय लाया गया। यहां भी कार्यकर्ताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। कुछ मिनट ठहरने के बाद शव यात्रा निगम बोध घाट की तरफ रवाना हुई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ-साथ सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी सहित प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेता और अन्य दलों के दिग्गज नेता शवयात्रा में शामिल थे। अंतिम संस्कार से पूर्व गार्ड ऑफ ऑनर के बाद पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटा गया। पार्थिव देह को कांधा देते हुए उनके बेटे संदीप दीक्षित, बेटी लतिका और परिजन जब शवदाह गृह जा रहे थे तो वहां मौजूद दीक्षित की बड़ी बहन रमा धवन, पोतियां व परिजनों समेत हर कोई फफक कर रो पड़ा। पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल, विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, दिल्ली सरकार के मंत्री इमरान हुसैन, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता व पर्यावरणविद सुनीता नारायण, दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडडा, पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन, गुलाम नबी आजाद व मुकुल वासनिक ने भी अंत्येष्टि स्थल पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
भावुक हो उठीं सोनिया
सोनिया गांधी ने शीला दीक्षित के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने शीला को अपनी बड़ी बहन और दोस्त बताया। इस दौरान वह भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा कि उनकी कमी पार्टी में हमेशा खलेगी। शीला दीक्षित का इस दुनिया से जाना कांग्रेस के लिए बहुत बड़ी क्षति है। वह हमें हमेशा याद आती रहेंगी। वह मेरे लिए बहुत बड़ा सहारा थीं।
किसी की मैडम तो किसी की ताई थीं शीला
दिल्ली सरकार के अधीन काम करने वाले नौकरशाह शीली दीक्षित को मैडम कहते थे। मैडम भी बड़े प्यार से उन्हें संबोधित करती थीं। शीला दीक्षित के साथ काम कर चुके एक नौकरशाह ने बताया कि अमूमन तो वह पूरा नाम लेकर पुकारती थी, लेकिन जब नाराज होती थी तो सिर्फ सरनेम से पुकारती थीं। ऐसे में हम समझ जाते थे कि वक्त पर काम पूरा नहीं होने के कारण मैडम नाराज हैं। गुस्सा होने के बावजूद मैडम कभी झल्लाकर बातचीत नहीं करती थीं। नौकरशाह उन्हें जहां मैडम कहते थे तो मीडियाकर्मी उन्हें ताई कहकर संबोधित करते थे। आपसी बातचीत में पत्रकार यही कहते थे कि ताई सचिवालय आ गई क्या।
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संसार छोड़ने के साथ एक परिपाटी छोड़ गई शीला
-प्रदूषण मुक्त दिल्ली का सपना संजोने वाली दीक्षित का अंतिम संस्कार सीएनजी शव दाहगृह में हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के प्रदूषण व पार्टी की चिंता पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की जेहन में अंतिम समय तक रही। इसका अंदाजा इस बात से लग सकता है कि प्रदूषण मुक्त दिल्ली के लिए सार्वजनिक वाहनों को पेट्रोल व डीजल मुक्त किया और सीएनजी लेकर आई। दिल्ली परिवहन में सीएनजी लाने का श्रेय उन्हीं को जाता है और इसी प्रदूषण की चिंता के कारण उनकी चिता चंदन की लकड़ी की जगह सीएनजी से चलने वाली शवदाह गृह में जली। यही उनकी इच्छा भी थी। अमूमन राजनेताओं का अंतिम संस्कार चंदन की लकड़ी से किया जाता है पर शीला ने ऐसी इच्छा नहीं जताई थीं।
दीक्षित ने सार्वजनिक परिवहन में सीएनजी लाने का विरोध भी झेला, लेकिन आज अपरिहार्य बन गया है। अपने इरादों पर अडिग रहने वाली पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित तमाम विरोधों का सामना कर दिल्ली को हरा-भरा करने का कदम उठाती रही। ‘हमारी दिल्ली मैं ही संवारूं’ अभियान के तहत अपने शासनकाल में दिल्ली को गैस का चैंबर बनने से रोकने के कई प्रयास किए। दिल्ली को केरोसिन मुक्त भी किया। सीएनजी आने के पहले शाम के वक्त आईटीओ चौराहे से कोई गुजरता था तो सांस लेना मुश्किल हो जाता था। लिहाजा इस दुनिया को छोड़ने के साथ वह एक परिपाटी छोड़ गई। इसी तरह उनका स्नेह पार्टी से भी रहा। स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद जब उन्हें दूसरी पारी के लिए आलाकमान ने दिल्ली की बागडोर सौंपी तो वह मना नहीं कर पाई। अमर उजाला के साथ साक्षात्कार में उन्हंोने कहा था कि पार्टी ने उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कहा है, इसे मैं इंकार नहीं कर सकती। पार्टी ने मुझ पर भरोसा जताया है। इसी तरह उनका अंतिम संदेश कार्यकर्ताओं के लिए यही था कि उत्तर प्रदेश सरकार प्रियंका गांधी को हिरासत से नहीं छोड़ती है तो आप कांग्रेस कार्यालय पर पहुंचे और वहां से प्रोटेस्ट मार्च निकालें।
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दलगत राजनीति से ऊपर उठकर दिल्ली के विकास को समर्पित रहीं
-विपरीत हालातों में सहजता से समस्याओं का निकालती थीं हल: मेहरा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के निधन पर शोक जताते हुए एमसीडी की पूर्व मेयर आरती मेहरा ने कहा कि शीला, दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विकास की दिशा में हमेशा आगे बढ़ती थीं। उनकी खास बात यह थी कि किसी मुद्दे पर विरोध भी हो तो सहज भाव से सुनकर माकूल जवाब देती थीं। पूर्व मेयर ने बताया कि एक बार मैंने थोड़े नाराजगी जताते यह कह दिया कि एमसीडी दिल्ली का अभिन्न अंग है, फिर अनदेखी क्यों की जा रही है। हालांकि बाद में जब इस बात का अहसास हुआ तो शीला दीक्षित के समक्ष यह बात रखी। उन्होंने बड़े सहज भाव में कहा मेरे साथ चाय पर आ जाओ, बातें करते हैं। सहजता उनकी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा था।
दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने कहा कि 2008 में विजय गोयल के नेतृत्व में जब मुख्यमंत्री निवास पर जाकर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से मुलाकात की और सड़क हादसे के पीड़ितों के लिए मुआवजा देने की मांग की तो तत्कालीन मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों के लिए सहानुभूति रखती हूूं, लेकिन उन्हें भी अपनी कमियों को दूर करना चाहिए। स्थायी समिति के अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री होने के बावजूद उन्हें बाहर की तमाम गतिविधियों की खबर होती थी। यह उनकी सोच को दर्शाता है। भाजपा नेता और स्थायी समिति के चेयरमैन ने शीला दीक्षित के साथ बिताए कुछ पल का जिक्र करते हुए कहा कि मेरी पत्नी की जब शीला दीक्षित से मुलाकात हुई तो वह उन्हें इतना पसंद आईं कि व्हाट्सएप की डीपी पर भी उनके फोटोग्राफ लगा लिए। उनके लिए दिल्ली का विकास सर्वोपरी था और निगम के लिए फंड की कभी दिक्कत भी हुई तो उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर इसे दूर करने की पूरी कोशिश की।