पुलिसकर्मी बनकर लोगों से ठगी करने वाले अंतरराज्जीय गैंग के चार बदमाशों को अपराध शाखा ने सराय काले खां इलाके से गिरफ्तार किया है। गैंग के सदस्य तलाशी के बहाने बुजुर्गों को अपना शिकार बनाते थे। गिरफ्तार गैंग के सरगना पर मकोका के तहत मामला दर्ज है। पुलिस ने इनके कब्जे से 52 ग्राम वजन का एक सोने का कड़ा, यूपी पुलिस, बिहार पुलिस और भारतीय सेना के बैज वाले तीन टोपी, वारदात में इस्तेमाल आई-10 कार और एक बाइक बरामद की है। पुलिस इनकी गिरफ्तारी से नौ मामले सुलझाने का दावा किया है।
पुलिस उपायुक्त राजेश देव ने बताया कि गिरफ्तार बदमाशों की पहचान अम्बेवाली महाराष्ट्र निवासी निसार मिश्किन सैयद, देवबंद यूपी निवासी इकबाल, सलमान अली और शब्बीर अली के रूप में हुई है। हाल के दिनों में खुद को पुलिसकर्मी बताकर ठगी के कई मामले सामने आए थे। इन मामलों की जांच की जिम्मेदारी अपराध शाखा को दी गई। निरीक्षक सुशील कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने घटनास्थलों के आस पास के सीसीटीवी कैमरों को खंगाला। फुटेज की जांच में गैंग के वारदात में शामिल होने की बात सामने आई।
उसके बाद पुलिस ने बदमाशों पर निगरानी बढ़ाई। 26 मई को बदमाशों के सराय काले खां आने की जानकारी मिली। पुलिस वहां पर घेराबंदी कर बदमाशों को दबोच लिया। बदमाशों ने बताया कि गैंग के दो सदस्य पुलिसकर्मी बनकर बुजुर्गों को निशाना बनाते थे। तलाशी की बात कहकर उन्हें अपने गहने उतारने के लिए कहते थे। फिर वह गहने को एक पेपर पैकेट में पैक करते थे और लौटने के बजाय असली गहने की जगह उन्हें नकली गहने का पैकेट दे देते थे।
इस दौरान गैंग का एक बदमाश राहगीर होने का नाटक करता था और अपना सामान उन्हें सौंपकर लोगों में विश्वास पैदा करने प्रयास करते थे। बदमाशों ने बताया कि गैंग ज्यादातर गहने की दुकान पर काम करने वालों को निशाना बनाते थे। बदमाशों ने बताया कि होटल में रहकर वारदात को अंजाम देते हैं और वारदात के बाद फरार हो जाते थे। पुलिस ने बताया कि सैयद गिरोह का सरगना है और मुंबई में दर्ज एक मकोका और नागपुर में धोखाधड़ी और डकैती के चार मामलों में वांछित था।