अस्पताल की इमरजेंसी के इलेक्ट्रिक पैनल में लगी आग अगर कमरे से निकलकर बाहर तक फैलने लगती तो बड़ा हादसा हो सकता था। इमरजेंसी के प्रथम तल पर 200 मरीज भर्ती थे। इन मरीजों के लिए बाहर निकलने को जो रास्ता था, वह आग वाले कमरे से जुड़ी गैलरी से ही जाता है।
अगर धुआं ज्यादा फैल जाता तो मरीजों के लिए गैलरी से निकलते समय देखना और सांस लेना मुश्किल हो जाता। 4.30 बजे के समय अस्पताल में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती भी बहुत कम होती है। ऐसे में मरीजों को जल्दी बाहर नहीं निकाला जा सकता था। इमरजेंसी में ऑक्सीजन सिलेंडर, कई ज्वलनशील पदार्थ और दवाएं होती हैं। आग फैल जाती तो स्थिति भयानक हो सकती थी।
मरीजों को वापस शिफ्ट किया
अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. वीके तिवारी ने कहा कि स्थिति पर समय रहते काबू पा लिया गया। सुबह 11 बजे इमरजेंसी में बिजली आपूर्ति फिर से शुरू हो गई। दोपहर 12 बजे मरीजों को वापस इमरजेंसी शिफ्ट किया गया। देर शाम तक इमरजेंसी सेवाएं सुचारु रूप से चलीं, लेकिन इमरजेंसी के बाहर पंजीकरण के लिए बने कंप्यूटर सिस्टम तक आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी थी। इस दौरान मरीजों का पंजीकरण हाथ से लिखकर एक रजिस्टर में किया गया।
डॉ. हर्षवर्धन ने किया दौरा
आरएमएल में आग की सूचना से अस्पताल प्रबंधन ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य मंत्रालय भी हरकत में आ गया। शनिवार सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदान और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने डॉक्टरों से लेकर तीमारदारों से जानकारी ली। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और आपात सेवाओं सहित सभी सेवाएं सुचारु रूप से चल रही हैं।
लोकनायक अस्पताल में भी लगी आग
दिल्ली सरकार के लोकनायक अस्पताल में भी शुक्रवार रात करीब सवा 12 बजे आग लग गई थी। सूचना मिलने पर दमकल विभाग की पांच गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाया। दमकल विभाग के मुताबिक, अस्पताल की छत पर तार में शॉर्ट सर्किट के चलते आग लगी थी। हालांकि मरीजों को कोई दिक्कत नहीं हुई।
अस्पतालों में पहले भी हुए हैं अग्निकांड
दिल्ली के अस्पतालों में पहले भी आग लगने की घटनाएं हुई हैं। इसी साल मार्च में एम्स के ट्रॉमा सेंटर में आग लगी थी। इस आग की वजह से प्रभावित दो ऑपरेशन थियेटर अभी तक शुरू नहीं हो सके हैं। इससे पहले एम्स के नर्सिंग कॉलेज में भीषण आग लगने से क्लासरूम जल गए थे। दिल्ली सरकार के दीपचंद बंधु अस्पताल, जीटीबी, अरुणा आसिफ अली और लोकनायक अस्पताल में बीते दो माह के दौरान आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं।