कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर और उनकी पत्नी सहित कई लोगों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने फर्जीवाड़े का मामला दर्ज किया है। यह मामला अदालत के आदेश के बाद दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप है कि इन लोगों ने फर्जी कागजात के जरिये करोल बाग स्थित करोड़ों रुपये की जमीन को अपने कब्जे में ले लिया है।
आर्थिक अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ओपी मिश्रा ने शिकायत दर्ज होने की पुष्टि की है और मामले की जांच होने की बात कही है। एक साल पहले विजय सेखरी ने आर्थिक अपराध शाखा को इस बाबत शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने कोई मामला दर्ज नहीं किया था।
विजय सेखरी की शिकायत पर पटियाला हाउस कोर्ट ने पुलिस को मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद जगदीश टाइटलर के खिलाफ इस वर्ष 9 जुलाई को शाखा ने मामला दर्ज किया। दरअसल, अदालत ने जब शाखा से इस शिकायत के बारे में पूछताछ की, तो कहा गया था कि शिकायत में दर्ज आरोपियों के हस्ताक्षर के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।
छतरपुर के रहने वाले विजय सेखरी ने अपनी शिकायत में कहा था कि इस मामले में जगदीश टाइटलर, उनकी पत्नी जेनीफर टाइटलर के साथ तमिलनाडु की सन रियल इस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, चेन्नई के वेंकटासुभा राव, विजय भास्कर, रवींद्र नाथ बाला कवि, मेसर्स गोल्डन मूमेंट्स करोलबाग, राकेश वधावन, संजय ग्रोवर, हरीश मेहता शामिल हैं।
मामला 1990 का है। विजय सेखरी और जगदीश टाइटलर की फर्मों ने संयुक्त रूप से 50-50 फीसदी की हिस्सेदारी में करोलबाग में दो रिहायशी संपत्तियां खरीदी थीं। वर्ष 2013 में संपत्तियों को व्यवसायिक श्रेणी में शामिल कर लिया गया। विजय सेखरी को पता चला कि 2009 में जगदीश टाइटलर ने संपत्तियों के दस्तावेज अपने पक्ष में कर लिए हैं।
विजय सेखरी अपना हक पाने के लिए कंपनी लॉ बोर्ड में चले गए। कंपनी लॉ बोर्ड ने संपत्तियों की कीमत 90 करोड़ आंकी थी। साथ ही आदेश दिया कि शिकायतकर्ता को उनका हिस्सा दिया जाए। बोर्ड के फैसले के खिलाफ जगदीश टाइटलर हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने भी यही आदेश दिया, लेकिन आरोपी पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। तब दोनों संपत्तियों की कीमत करीब 270 करोड़ निकलकर सामने आई।