दो दिव्यांग बेटियों का इलाज कराने के लिए पिता ने तीसरी बेटी के पैदा होते ही 40 हजार में बेच दिया। बाद में पछतावा होने पर वह खुद महिला आयोग का दरवाजा खटखटाकर बेटी वापस दिलाने की गुहार लगाई।
महिला आयोग और बुराड़ी थाना पुलिस ने ढाई माह की बच्ची को सकुशल मुक्त करा लिया। पुलिस ने बच्ची के पिता अमनप्रीत, बच्ची खरीदने वाले शख्स संजय मित्तल और मंजू व मनीषा को गिरफ्तार कर लिया है।
मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। अभी तक जांच में मासूम को चार बार बेचे जाने की बात सामने आई है। पुलिस मामले में मानव तस्करी करने वाले गिरोह के शामिल होने की आशंका जता रही है।
जानकारी के अनुसार बुराड़ी निवासी अमनप्रीत ने बुधवार शाम को महिला आयोग की महिला पंचायत में बेटी को बेचने की पूरी बात बताई और अपनी बेटी को वापस पाने की इच्छा जताई। अमनप्रीत ने बताया कि वह मजदूरी करता है। उसके यहां बड़ी बेटी पैर से दिव्यांग है।
वहीं दूसरी बेटी देख नहीं सकती। दोनों का इलाज जारी है और उसके पास इलाज के लिए भी पैसे नहीं थे। पहली अगस्त को अपनी तीसरी बेटी को मनीषा नामक महिला को जाफराबाद में बेच दिया।
महिला आयोग व पुलिस की टीम ने जाफराबाद स्थित मनीषा के घर पर बुधवार देर रात को छापेमारी की तो पता चला कि मनीषा ने मादीपुर में इंदू नामक महिला को बच्ची दे दी थी। इंदू ने बताया कि उसने शकूरपुर में राधा नामक महिला को बच्ची को बेच दिया था।
पुलिस की टीम शकूरपुर पहुंची तो पता चला कि राधा ने बताया कि उसने चावड़ी बाजार में रहने वाली अपनी बहन को बच्ची बेच दी है। वहां से बच्ची को फिर त्रिलोकपुरी और बाद में हौजकाजी में संजय मित्तल को 80 हजार रुपये में बेचा गया। संजय की कोई औलाद नहीं थी।
पुलिस ने बृहस्पतिवार तड़के संजय को गिरफ्तार कर मासूम को कब्जे में ले लिया। मामले में मंजू, मनीषा, संजय और अमनप्रीत को गिरफ्तार कर लिया गया। मंजू संजय की पड़ोसी है।