पिछले 130 दिनों से कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का विरोध जारी है। तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने, एमएसपी की गारंटी की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी, आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों की याद में दिल्ली की तीनों सीमाओं पर स्मारक बनाएंगे। इसके लिए देश भर के करीब 2000 गांवों से मिट्टी लाई जा रही है। स्वाधीनता संग्राम के शहीदों के गांवों से इकट्ठा मिट्टी से सीमाओं पर किसानों की याद में स्मारक बनाए जाएंगे।
मिट्टी सत्याग्रह यात्रा के नेतृत्व कर रही सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने बताया कि किसानों के हक की लड़ाई में जान गंवाने वाले किसानों की याद में स्मारक बनाने के लिए मिट्टी लाई जा रही है। मेधा पाटकर ने बताया कि तेलंगाना, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा से होती हुई यात्रा छह अप्रैल को दिल्ली के गाजीपुर और सिंघु बॉर्डर पर पहुंचेगी।
रविवार को शाहजहांपुर पहुंचने से चंद किलोमीटर पहले मेधा पाटकर ने यह मिट्टी, देश के किसानों की शान है। इस यात्रा के जरिये किसान न केवल जमीन पर खेती के हक को बताएंगे तो दूसरी तरफ अपनी जमीन पर कॉरपोरेट्स के बढ़ते दखल पर रोक लगाने के लिए संघर्षरत हैं। सोमवार को मिट्टी सत्याग्रह यात्रा टिकरी बॉर्डर पहुंचेगी। इसके बाद मंगलवार सुबह गाजीपुर जबकि दोपहर बाद यह यात्रा सिंघु बॉर्डर पर पहुंचेगी।