-गाजीपुर किसान आंदोलन में मंच से नन्हें-मुन्नों ने की किसानों से अपील, कहा आत्महत्या से नहीं निकल सकता हल
-दिल्ली से पहुंचे बच्चे ने किसान आंदोलन में अपनी गुल्लक दान की, कहा बच्चे भी देश के अन्नदाता के साथ
कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन के दौरान कई किसानों ने आत्महत्या कर अपनी जान दे दी है। बुधवार को टिकरी बॉर्डर पर एक किसान के जहर खाकर आत्महत्या करने की खबर सुनकर कुछ नन्हें-मुन्ने गाजीपुर बॉर्डर पर अपने अभिभावकों के साथ पहुंचे।
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बच्चों ने बेहद मासूमियत के साथ किसानों से अपील की के वह आत्महत्या न करें। इन नन्हें-मुन्नों का कहना था कि अभी बलिदान की नहीं संघर्ष की जरूरत है। आत्महत्या करने से किसी भी समस्या का हल नहीं निकल सकता।
किसी परेशानी का हल निकालने के लिए जिंदा रहना जरूरी है। बच्चों ने किसान आंदोलन की तुलना स्वतंत्रता संग्राम से की। मंच से बच्चों का संबोधन सुनकर किसानों का हौसला खूब बढ़ा। बुजुर्ग किसानों ने छोटे-छोटे मासूमों को अपना आशीर्वाद दिया।
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गाजीपुर में दोपहर करीब एक बजे के आसपास कृष्णा नगर, गांधी नगर व गीता कालोनी से कुछ बच्चे अपने अभिभावकों के साथ किसान आंदोलन के समर्थन में पहुंचे थे। दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले सार्थक मलिक (7) अपने साथ अपनी गुल्लक लाया था।
मंच पर बोलने के बाद सार्थक ने अपनी गुल्लक किसानों को सौंप दी। तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले मृदुल गोयल ने कहा कि सरकार ने आज ऐसे हालात पैदा कर दिए कि पिता-पुत्र को आमने सामने खड़ा दिया। देश के जवान भी तो किसानों के बेटे हैं। पुलिस के जवान आज सरकार के आदेश पर किसानों को रोकने के लिए मजबूर हैं। लेकिन किसानों की आवाज को कोई नहीं दबा पाएगा।
छठी कक्षा में पढ़ने वाले आगम जैन (11) ने सिख गुरुओं को याद करते हुए किसानों को संबोधित किया। एक बच्चे की मां ने बताया कि पिछले काफी समय से उनका बेटा गाजीपुर आने की जिद कर रहा था। टीवी पर किसान आंदोलन को देखकर उसने ही यहां आने की जिद की थी। बुधवार को वह बाकी बच्चों के साथ उसे लेकर यहां पहुंची थी।