सिंघु बॉर्डर पर भारी बैरिकेडिंग और कंटीली तारें लगाए जाने से आंदोलनकारी किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। सीमा पर आने जाने के रास्ते में रुकावट की वजह से न तो पानी के टैंकर और न ही जरूरत के मुताबिक टॉयलेट की सुविधा मिल रही है। नतीजतन, आसपास के घरों से या आंदोलन स्थल पर लगाए गए एक आरओ प्लांट से प्रदर्शनकारी अपने जरूरी काम कर रहे हैं।
पिछले 70 दिनों से सिंघु बॉर्डर पर आंदोलनकारियों को बैरिकेडिंग बढ़ाए जाने से पानी और टॉयलेट की बुनियादी जरूरतों के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के इकबाल सिंह ने बताया कि लंगर तैयार करने में पानी की कमी की वजह से मुश्किलें पेश आ रही है। इसके लिए या तो बाहर से बड़े बोतल मंगवाए जा रहे हैं तो नजदीकी आरओ से भी जरूरतें पूरी हो रही हैं। लेकिन पानी के टैंकर नहीं पहुंचने की वजह से न केवल पानी बल्कि टॉयलेट का भी इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया है। आसपास के घरों से भी काफी सहयोग मिल रहा है। लंबे समय तक अगर ऐसे हालात रहे तो मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
पैक बोतल और आरओ प्लांट से पूरी हो रही है जरूरत
खालसा एड की तरफ से तैयार किए गए आरओ प्लांट से भी 20 लीटर के जार में पानी का जरूरी कार्यों में इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकतर जगहों पर पीने के लिए पैक बोतलों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जरूरत पड़ने हरियाणा के गांवों से भी आंदोलनकारी किसानों को सहयोग मिल रहा है।
पानी की किल्ल्त से टॉयलेट का भी इस्तेमाल करना हुआ मुश्किल
सिंघु बॉर्डर पर दिल्ली की तरफ दिल्ली सरकार की ओर से अस्थायी टॉयलेट लगाए गए थे। लेकिन रास्ते में बैरिकेडिंग और पानी की कमी के कारण आंदोलनकारी इनका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। हरियाणा की तरफ कुछ टॉयलेट हैं, लेकिन संख्या काफी कम होने की वजह से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।