किसान संगठनों के बीच एक फरवरी बजट के दिन संसद की तरफ प्रस्तावित पैदल मार्च में ट्रैक्टर मार्च की हिंसा के बाद असमंजस पैदा हो गया है। संयुक्त मोर्चा से जुड़े कुछ किसान संगठन मार्च को स्थगित करने के हक में हैं। हालांकि, अभी इस मसले पर खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।
एक किसान नेता ने बताया कि हिंसा के बाद संभावना इस बात की ज्यादा है कि मार्च को स्थगित कर दिया जाए। लेकिन इस पर अंतिम फैसला संयुक्त किसान मोर्च का होगा। बुधवार की बैठक में इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है। इस दौरान सिर्फ हिंसा के बाद उपजे हालात पर ही किसान नेताओं ने आपस में बात की और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है।
ट्रैक्टर रैली के दौरान हिंसा और उपद्रव का असर दूसरे दिन बुधवार को टीकरी बॉर्डर पर भी दिखा। सीमा पर आंदोलन समर्थकों की संख्या में कमी आई है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि 15-20 फीसदी किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ वापस लौट गए हैं। हालांकि, किसान संगठनों का दावा है कि पहले की तरह अपनी मांगों पर डटे रहेंगे। जो भी किसान वापस लौट रहे हैं, वह खास तौर पर रैली के लिए ही दिल्ली पहुंचे हुए थे।
दूसरी तरफ टिकरी बॉर्डर से नांगलोई और पीरागढ़ी के बीच रैली के दौरान हुई तोड़फोड़ को दुरूस्त किया गया है। वहीं, नांगलोई फ्लाईओवर और नजफगढ़ रोड से बैरिकेड्स हटा दिए गए। लेकिन टीकरी बॉर्डर पर एक बार फिर बैरिकेड्स पहले की तरह ही लगा दिए गए हैं। पुलिस की कोशिश है कि प्रदर्शनकारी दुबारा दिल्ली में प्रवेश न कर सकें।
रैली के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ की किसान संगठनों ने भी निंदा की है। किसान समर्थकों का आरोप है कि आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश के तहत ऐसी घटनाएं हुई हैं। टीकरी बॉर्डर से ट्रैक्टर रैली में शामिल हुए अधिकतर लोग लौट चुके हैं, इसलिए प्रदर्शन स्थल पर पहले की तुलना में थोड़ी कम भीड़ नजर आ रही है। उपद्रव और हिंसा की हर तरफ हो रही निंदा को देखते हुए कुछ लोग अपने घरों के लिए लौटने लगे हैं। कुछ समर्थकों का कहना है कि लंबे समय तक दिल्ली की सीमा पर रहने के लिए फिलहाल लौट रहे हैं और जल्द ही लौटेंगे।
नांगलोई के पास से हटाए गए बैरिकेड्स
नांगलोई मेट्रो स्टेशन के पास मंगलवार को पूरे दिन अफरातफरी की स्थिति बनी रही, जिन्हें दुरुस्त किया गया। बुधवार को सड़क पर लगाए बैरिकेड्स और लॉरी को हटा दिया गया। बैरिकेड्स हटाए जाने के बाद वाहनों का सामान्य तौर पूरे दिन आवागमन हुआ। हालांकि पीरागढ़ी तक हर तरफ सुरक्षा बल मुस्तैद हैं और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।