डॉक्टर के कहने पर एसआई ने मुकेश चंद (42) की मौत कोरोना से बताकर शव जीटीबी अस्पताल की मोर्चरी से बिना पोस्टमार्टम ले जाने को कहा। इससे गुस्साए उसके भाइयों महेश, सुरेश और रमेश ने केस की फाइल फाड़कर एसआई की पिटाई कर दी।
डॉक्टर के कहने पर एसआई ने मुकेश चंद (42) की मौत कोरोना से बताकर शव जीटीबी अस्पताल की मोर्चरी से बिना पोस्टमार्टम ले जाने को कहा। इससे गुस्साए उसके भाइयों महेश, सुरेश और रमेश ने केस की फाइल फाड़कर एसआई की पिटाई कर दी। बाद में पुलिस बल बुलाकर तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेजा गया। अगले दिन पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के बाद परिवार के हवाले कर दिया।
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परिजनों का कहना था कि मुकेश की मौत हार्ट अटैक से हुई थी। जीटीबी अस्पताल के डॉक्टर जबरन उसे कोरोना का रोगी बताकर पोस्टमार्टम से बच रहे थे। पुलिस के मुताबिक, परिवार के साथ गंगा विहार, गोकुलपुरी में रहने वाले मुकेश चंद की हालत 20 अप्रैल की रात अचानक बिगड़ गई। मैक्स अस्पताल में इलाज के दौरान अगले दिन उसकी मौत हो गई। मैक्स अस्पताल से शव अगले दिन जीटीबी अस्पताल की मोर्चरी में भेजा गया। गोकुलपुरी थाने के एसआई लक्ष्मी नारायण (59) को जांच अधिकारी बनाया गया।
लक्ष्मी नारायण ने 22 अप्रैल को परिजनों को पोस्टमार्टम के लिए जीटीबी अस्पताल की मोर्चरी बुलाया। मोर्चरी के डॉक्टरों ने परीक्षण किया तो कोविड से मौत का अंदेशा जताकर शव बिना पोस्टमार्टम के ले जाने को कह दिया। लक्ष्मी नारायण ने परिजनों से यह बात कही तो वे भड़क गए। उनका कहना था कि मुकेश की मौत हार्ट अटैक से हुई थी। डॉक्टर और पुलिस मिलकर पोस्टमार्टम से बच रहे हैं। उन्होंने लक्ष्मी नारायण से केस की फाइल छीनकर फाड़ दी। उसकी पिटाई कर वर्दी भी फाड़ दी।
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हालात बिगड़ते देख जीटीबी एन्क्लेव थाने से पुलिस बुलाई गई। लक्ष्मी नारायण के बयान पर विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर मुकेश के तीन भाइयों को गिरफ्तार कर लिया गया। कोर्ट के आदेश पर तीनों को मंडोली जेल भेज दिया गया।