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Delhi: केवल विवाहेतर संबंध आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप के लिए अपर्याप्त, हाईकोर्ट ने खारिज की अपील

Tue, 16 Dec 2025 01:55 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फैसले में पत्नी के आत्महत्या के मामले में आरोपी पति हामिद के बरी होने के ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखते हुए अभियोजन की अपील खारिज कर दी है।
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फैसले में पत्नी के आत्महत्या के मामले में आरोपी पति हामिद के बरी होने के ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखते हुए अभियोजन की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पति का विवाहेतर संबंध होना अकेले भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसावा) के तहत अपराध स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति मनोज जैन की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि यह स्पष्ट हो जाता है कि विवाहेतर संबंध का मात्र अस्तित्व धारा 306 को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। कोई ऐसी सामग्री नहीं है जो किसी तत्काल या सीधे उकसावे या ऐसे आचरण को इंगित करे जो पीड़िता को आत्महत्या करने के लिए मजबूर करता हो। इसलिए, हम ट्रायल कोर्ट के निष्कर्षों में कोई विकृति नहीं पाते। यह मामला नवंबर 2010 में पीड़िता की मौत से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, 30 अक्तूबर 2010 को नाजरीन को उसके रिश्तेदारों द्वारा एम्स अस्पताल लाया गया था, जहां फांसी लगाने का प्रयास बताया गया। 

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दिव्यांगों के लिए आरक्षित पद भरने में लापरवाही, कोर्ट ने लगाई फटकार  
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को दिव्यांगजन उम्मीदवारों के लिए आरक्षित बैकलॉग पदों को भरने में विफल रहने पर कड़ी फटकार लगाई है। न्यायालय ने सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे को अदालत को भ्रमित करने का प्रयास करार देते हुए अवमानना कार्यवाही शुरू करने की चेतावनी दी है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने राष्ट्रीय अंध संघ (नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड) की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मार्च 2023 में दिए गए निर्देशों के बावजूद सरकार ने विशेष भर्ती अभियान शुरू नहीं किया। अदालत ने 2023 में दिल्ली सरकार को विभिन्न विभागों में दिव्यांगों के लिए 1,351 बैकलॉग रिक्तियों, जिसमें दृष्टिबाधितों के लिए 356 पद शामिल हैं, को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने का आदेश दिया था। पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आपका हलफनामा अदालत को भ्रमित करने की कोशिश है। आप सामान्य भर्ती को विशेष भर्ती अभियान के साथ मिला रहे हैं, जहां बैकलॉग रिक्तियां भरनी थीं। न्यायालय ने सरकार की उस दलील पर भी असंतोष व्यक्त किया कि बैकलॉग रिक्तियों की पहचान करने में 12 महीने से अधिक समय लग गया। मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को होगी।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने वकीलों को हाइब्रिड सुनवाई का दिया सुझाव
राजधानी में गंभीर प्रदूषण स्तर के बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने वकीलों और व्यक्तिगत रूप से पेश होने वाले पक्षकारों को अपने मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हाइब्रिड मोड में उपस्थित होने की सलाह दी है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया है कि वर्तमान मौसम स्थितियों को देखते हुए यदि सुविधाजनक हो तो बार के सदस्यों और व्यक्तिगत पक्षकारों को सम्माननीय अदालतों के समक्ष सूचीबद्ध मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा के माध्यम से हाइब्रिड मोड में उपस्थित होने का लाभ उठाया जा सकता है। हाईकोर्ट वर्तमान में हाइब्रिड मोड में कार्यरत है, जहां सुनवाई शारीरिक और आभासी दोनों तरीकों से होती है। रविवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध मामलों के लिए बार सदस्यों और पक्षकारों को मौसम स्थितियों को देखते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग करने की सलाह दी थी। 
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