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(नोट: आंकड़ा रात में अपडेट किया जाएगा) लाइव...200 लोक अदालत पीठों से त्वरित न्याय, कम हर्जाने में समाधान

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(नोट: आंकड़ा रात में अपडेट किया जाएगा
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-उच्च न्यायालय और सात जिला अदालतों में दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से साल की चौथी लोक अदालत आयोजित

-लोगों को आधी से भी कम कीमत पर यातायात चालान, छोटे-मोटे आपराधिक मामले, सिविल विवाद और अन्य कानूनी मसले सुलझे

संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राजधानी के उच्च न्यायालय और सात जिला अदालतों में दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से शनिवार को साल की चौथी लोक अदालत आयोजित की गई। इस दौरान कम समय में लाखों मामलों का निस्तारण किया गया। लोगों को आधी से भी कम कीमत पर अपने चालानों का निस्तारण कर काफी राहत मिली।
दिल्ली के सातों जिला न्यायालय परिसरों में कुल 200 लोक अदालत पीठों का गठन किया गया, जिनके माध्यम से लगभग 2,00,000 चालानों के निस्तारण की व्यवस्था की गई। सभी सात जिला न्यायालय परिसरों में कुल 1,27,469 मामलों का निस्तारण 1.41 करोड़ रुपये की राशि में किया गया। लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के मामलों जैसे यातायात चालान, छोटे-मोटे आपराधिक मामले, सिविल विवाद और अन्य कानूनी मसलों का समाधान किया गया। आम नागरिकों की सुविधा के लिए जगह-जगह सहायता केंद्र स्थापित किए गए थे। जहां दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के वॉलंटियर्स ने लोगों को उनके मामलों और चालानों से संबंधित जानकारी और मार्गदर्शन किया। लोगों ने कहा कि इस तरह के आयोजन से न केवल उनका समय और पैसा बचता है, बल्कि न्यायपालिका में उनका विश्वास भी मजबूत होता है।
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डीएसएलएसए ने यह सुनिश्चित किया कि न्यायालय परिसरों में आने वाले नागरिकों को सुगम और सुरक्षित अनुभव मिले। इसके लिए सभी जरूरी सुविधाएं जैसे सहायता डेस्क, रैंप, व्हीलचेयर, पेयजल और शौचालय की समुचित व्यवस्था की गई। दिल्ली की सभी सातों जिला न्यायालय परिसरों में कुल 200 लोक अदालत पीठ गठित की गईं। इनमें केंद्रीय, पश्चिम, दक्षिण, नई दिल्ली, शाहदरा, कड़कड़डूमा, रोहिणी और द्वारका न्यायालय परिसर शामिल रहे।

जगह-जगह बने थे सहायता केंद्र

साकेत कोर्ट : 01:00 बजे, दोपहर

अदालत परिसर में जगह-जगह महिला, दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिकों और सामान्य जन की मदद के लिए सहायता केंद्र बनाए गए थे। यहां पर लोग अपने मुकदमे से संबंधित न्यायाधीश, कक्ष और अन्य जानकारी प्राप्त कर रहे थे। कई कक्षों में लोक अदालत का आयोजन होने से किसी भी कक्ष के बाहर अधिक भीड़ नजर नहीं आई।

कम छूट मिली तो कई लोग मायूस भी हुए

कड़कड़डूमा कोर्ट : सुबह 11:00 बजे

कड़कड़डूमा कोर्ट में पूर्व पंजीकरण के आधार पर लोग शनिवार को अपना चालान निपटवाने पहुंचे। इस दौरान अदालत में मामले के आधार पर विभिन्न न्यायाधीशों के पास जाकर लोगों ने अपना चालान निस्तारित कराया। किस व्यक्ति का कौन सा मामला किस न्यायाधीश के पास है, इसकी जानकारी अदालत में सूचना पट्ट पर लगाकर वहां प्रदर्शित की गई थी। लोगों ने न्यायाधीश के कमरे में जाकर करीब 10 से 15 प्रतिशत रकम का भुगतान कर अपने चालान का निस्तारण कराया। वहीं, कुछ लोगों को लोक अदालत में आने के बाद भी मामूली छूट मिलने से उनके बीच नाराजगी भी देखने को मिली।

अदालत परिसर में दिनभर रही भीड़
तीस हजारी कोर्ट : 02:00 बजे, दोपहर

अदालत परिसर में लगी लोक अदालत में सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटी रही। कोर्ट परिसर के प्रवेश द्वार पर तंबू लगाया गया था, जिसमें लोग बैठे थे। लोगों को कहना है कि ऐसी लोक अदालत समय-समय पर होनी चाहिए।

वकीलों के चालान का भी हुआ सेटलमेंट

पटियाला हाउस कोर्ट : दोपहर 03:00 बजे

पटियाला हाउस कोर्ट में दिल्ली के विभिन्न स्थानों से लोग अपने चालान को ऐसे निपटाने के लिए पहुंचे। इसमें कई लोग भी थे, जिनके गाड़ी के प्रदूषण के चालान काफी महीनों से लंबित थे। साथ ही रेड लाइट जंप से लेकर प्रदूषण प्रमाण पत्र न होने के भी चालानों को निपटने के लिए लोग पहुंचे। महीनों से लंबित चालानों का यहां महज थोड़ी देर में निपटारा हो गया। तीस हजारी कोर्ट में वकालत कर रहे एक वकील ने बताया कि उनका एक कैमरे का चालान था, जो महज चंद रुपये में सेटलमेंट हो गया।

सुलह-समझौते का उत्साहपूर्ण माहौल

राउज एवेन्यू कोर्ट : दोपहर 03:30 बजे

राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में सुबह 10 बजे शुरू हुए इस आयोजन में लंबित मामलों के निपटारे के लिए सुलह-समझौते का उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला। खास तौर पर, ट्रैफिक चालानों को कम राशि या पूरी तरह माफ करने की प्रक्रिया ने लोगों का ध्यान खींचा। कोर्ट परिसर में हेल्प डेस्क और पैरा-लीगल वालंटियर्स की मौजूदगी ने लोगों को अपने दस्तावेज और टोकन के साथ सुनवाई की प्रक्रिया को समझने में मदद की।
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बाइट

मेरा फर्नीचर का कारोबार है। मेरी मोटरसाइकिल का इंश्योरेंस संबंधी साढ़े चार हजार रुपये का चालान हुआ था। लोक अदालत में आने के बाद भी मुझे दो हजार रुपये का भुगतान करना पड़ा।- राहुल



मैं एक ऑटो चालक हूं। मीटर से अधिक चार्ज करने पर मेरा दस हजार का चालान काटा गया था। लोक अदालत में शून्य कीमत पर उसका निपटारा हो गया।-वसीम
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