कोरोना महामारी में वायरस कई स्वरूप बदल चुका है, जिसका परिणाम सबके सामने है। लेकिन अगर पहले दिन से संदिग्ध या संक्रमित सतर्क हो जाएं तो उसे न सिर्फ संक्रमण से अधिक दिक्कतें नहीं होंगी बल्कि वह खुद को अस्पताल और ऑक्सीजन के संकट से दूर भी रख सकता है। इसके लिए जरूरी है कि लोग इलाज लेने के लिए जांच रिपोर्ट आने का इंतजार न करें।
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सुमित वर्मा भी कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति खुद को बीमार या संक्रमित मानने को तैयार नहीं होता। यह दूसरे के संक्रमित होने की वजह से खुद की जांच कराते हैं और रिपोर्ट आने के बाद इनके हाथ-पैर फूलने लगते हैं। ऐसे में अमर उजाला ने प्रशांत विहार स्थित पंचकर्म अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरपी पाराशर से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि दूध में बादाम, किशमिश, खजूर, तुलसी इत्यादि डालकर गरम- गरम सेवन करें। इससे पेट में गैस भी नहीं बनेगी।
सबसे पहले लक्षण को पहचानें
परिवार में अगर किसी व्यक्ति की दिनचर्या में कोई बदलाव आ रहा है तो उस पर जरूर ध्यान दें। हल्का सा भी बदलाव या फिर किसी भी तरह का लक्षण आपको सतर्क करने के लिए काफी है। अगर लक्षण हैं तो जांच करवा सकते हैं लेकिन उसके लिए रिपोर्ट आने का इंतजार न करें, क्योंकि इसमें कुछ दिन का वक्त भी लग सकता है। जिन दिन लक्षण मिलें उसी दिन से उपचार शुरू कर देना चाहिए।
पहला उपचार : ठंडी चीजों से करें तौबा
पहला उपचार ठंडी चीजों के खिलाफ है। कोल्डड्रिंक, पानी सहित फ्रिज में रखे पदार्थों का सीधे सेवन न करें। एसी को बंद रखने में ही भलाई है। इस संक्रमण काल में ठंडी वस्तुओं का सेवन शरीर में बलगम और तेजी से बढ़ाएगा जोकि काफी घातक हो सकता है। संक्रमण को अगर आसान शब्दों में कहें तो शरीर में बलगम बनने से रोकना है। जब तक इसमें कामयाबी रहेगी, वायरस हावी नहीं होगा।
दूसरा उपचार : गर्म चीजों का सेवन
दूसरे उपचार के रूप में लोगों को गर्म चीजों का सेवन करना है। जैसे दूध, पानी, चाय या फिर काढ़ा। इसका गरम सेवन करने से बलगम कम होगा। चाय में अदरक कम रखें क्योंकि अभी गर्मी भी है। दिन में दो बार इसका सेवन करें। इसे लेने के बाद पंखा बंद करके कंबल या चादर डालकर लेट जाएं। पांच से 10 मिनट में पसीने आएंगे। 15 मिनट बाद पसीने आना बंद भी हो जाएगा। इससे यह होगा कि फेफड़ों में बलगम जम नहीं पाएगा और ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी।
तीसरा : ऑक्सीजन को बढ़ाना
अगर किसी का ऑक्सीजन स्तर 90 से 92 तक हो तो ऐसे रोगी को बैठाकर छाती और कमर पर थपकी मारनी है। ऐसा करने से फेफड़ों में जमा होने वाला बलगम बाहर आएगा। अगर कोई आइसोलेशन में है और अकेला है तो दिन में चार से पांच बार 5 से 10 मिनट के लिए खांसने का अभ्यास करे ताकि बलगम बाहर आ सके।
प्रोन पोजिशन के लिए ध्यान देने की बात
अगर प्रोन पोजिशन में रहना चाहते हैं तो ध्यान रहे कि पेट के नीचे तकिया न हो। केवल छाती और जांघ के नीचे ही तकिया रखा जाए। ज्यादातर लोग पेट के नीचे तकिया रख लेते हैं जिससे इस अभ्यास का लाभ नहीं मिल पाता है।
ये भी जरूर करें
प्राणायाम, अनुलोम विलोम। गहरी सांस लें, कुछ देर तक उसे रोकने का प्रयास करें और फिर छोड़ें। यह अभ्यास दिन में दो से तीन बार करें और हर बार अवधि बढ़ाने की कोशिश करें। ताकि फेफड़ों को मजबूती मिल सके।