उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने कुतुबगढ़ एवं आसपास के गांवों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2014 में शहीद भगत सिंह एलोपैथिक डिस्पेंसरी के लिए भवन बनाने की शुरूआत की थी और वर्ष 2017 में यह भवन बनकर तैयार हो गया था, लेकिन इस भवन में स्वास्थ्य सेवा शुरू नहीं हुई थी और भवन पर ताला लगा हुआ था।
उत्तर पश्चिम दिल्ली के कुतुबगढ़ गांव में बनी डिस्पेंसरी के भवन का करीब चार साल बाद ताला खुल गया है। यहां इलाके के लोगों का इलाज करना भी आरंभ कर दिया गया है। डिस्पेंसरी का भवन बनने के बाद से उस पर ताला लगा हुआ था। इस संबंध में 18 मई को अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद उत्तरी दिल्ली नगर निगम में हड़कंप मच गया था।
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उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने कुतुबगढ़ एवं आसपास के गांवों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2014 में शहीद भगत सिंह एलोपैथिक डिस्पेंसरी के लिए भवन बनाने की शुरूआत की थी और वर्ष 2017 में यह भवन बनकर तैयार हो गया था, लेकिन इस भवन में स्वास्थ्य सेवा शुरू नहीं हुई थी और भवन पर ताला लगा हुआ था।
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान गांवों में बड़ी संख्या में इलाज के अभाव में ग्रामीणों की मौत होने पर इलाके की स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में इस डिस्पेंसरी के भवन की अमर उजाला में खबर प्रकाशित हुई थी। इसके बाद उत्तरी दिल्ली नगर निगम की चौतरफा निंदा होने लग गई थी। इसके बाद नगर निगम ने डिस्पेंसरी में स्वास्थ्य सेवाएं शुरू करने का निर्णय लिया।
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नगर निगम ने इस सप्ताह की शुरूआत में डिस्पेंसरी में लोगों के इलाज के लिए एक डॉक्टर एवं अन्य कर्मचारी नियुक्त कर दिए गए हैं और यहां पर लोगों ने भी इलाज कराने के लिए आना आरंभ कर दिया है। यहां पर स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं होने पर भवन की खिड़की व दरवाजे टूटने शुरू हो गए थे। इस मामले में इलाके में कार्य कर रही संस्था सेंटर फॉर यूथ कल्चर लॉ एंड एनवायरमेंट के अध्यक्ष पारस त्यागी ने उपराज्यपाल का दरवाजा भी खटखटाया था।