ट्रैक्टर रैली में शामिल होने के लिए हजारों की संख्या में युवक शामिल होंगे। सुबह से ही ट्रैक्टरों की सजावट की जा रही थी ताकि परेड में दूर से अलग पहचान हो सके। ट्रैक्टरों पर राष्ट्रीय ध्वज और यूनियन के झंडों के साथ लाइटें, छतरी और चमकने वाली लड़ियां और गीत संगीत के लिए स्टीरियो भी लगाए गए हैं। ट्रैक्टर परेड में अगर तीनों बॉर्डर पर अगर 50 हजार ट्रैक्टर भी शामिल होते हैं तो इनपर एक दिन में 25 करोड़ से अधिक का डीजल खर्च होगा।
किसानों की मांगों के समर्थन में नगर अराईयां(जालंधर) से आए किसान हरप्रीत सिंह बताया कि ट्रैक्टरों को न केवल सजाया गया है बल्कि इसके साथ साथ लाइटें, स्टीकर, छतरी के अलावा सजावट के कई सामान लगाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि ट्रैक्टरों की संख्या अधिक होने की वजह से 5-10 घंटे का वक्त लग सकता है। सात लीटर डीजल में एक घंटे तक ट्रैक्टर को चलाया जा सकता है यानि परेड के दौरान एक ट्रैक्टर पर करीब 70 लीटर डीजल खर्च होने की उम्मीद है।
कुरुक्षेत्र से ट्रैक्टर लेकर आए जसबीर सिंह ने बताया कि पूरे रास्ते में हजारों की संख्या में ट्रैक्टर होने की वजह से उनहें 5-10 किलोमीटर की रफ्तार से चलना पड़ा। परेड के लिए ट्रैक्टर में डीजल फुल कर लिया है।
किसानों के हक के लिए पहुंचे परेड में
हरप्रीत सिंह ने बताया कि न केवल ट्रैक्टरों को सजाकर तैयारी की गई, बल्कि किसानों के समर्थन में परेड में शामिल होने के लिए दिल से भी पूरी तैयारी है। उन्होंने कहा कि ट्रैक्टर में पिछले कई दिनों से युवा किसान, एक्सेसरीज लगवा रहे हैं ताकि उन्हें भी परेड में अलग दिखने का मौका मिल सके। अपने हक के लिए किसानों के समर्थन में उतरने का सभी को हक है, इसलिए परेड के लिए पूरी तैयारी है।
झलकियां
. टीकरी बॉर्डर पर तैनात किए गए 1500 वॉलेंटियर
. नहीं होंगे वॉकी टॉकी, पूरे दिन रहेंगे मुस्तैद
. मंगलवार को हटाए जाएंगे बैरिकेट्स, संभावना जताई जा रही है कि सुबह 11 बजे के बाद अलग अलग बॉर्डर से बैरिकेट्स हटा दिए जाएं
. सिंघु पर भी पूरे दिन यूनिफॉर्म में स्वयंसेवक मुस्तैद रहे