जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (डीजीजीआई) ने बृहस्पतिवार को पीयूष जैन की तरफ से 52 करोड़ रुपये का बकाया कर चुकाए जाने का प्रस्ताव मानने व कर चुकाने की अनुमति की चर्चाओं को बेबुनियाद बताया है। अतिरिक्त निदेशक जाकिर हुसैन ने बताया कि जब्त सोना डीआरआई को सौंप दिया है। चंदन की 600 किलो लकड़ी जब्त की है। दो सौ से ज्यादा जाली इनवाइस मिले हैं। इन सबूतों का जांच के बाद कर व जुर्माने की रकम तय होगी।
ओडोकेम इंडस्ट्रीज, कन्नौज के मालिक पीयूष जैन के खिलाफ जारी मामले में डीजीजीआई की जांच में अब तक 197.47 करोड़ रुपये नकद, 23 किलो सोना व अन्य कीमती व आपत्तिजनक वस्तुएं मिली हैं। डीजीजीआई ने बताया कि नकदी को भारतीय स्टेट बैंक के पास केस संपत्ति के तौर पर सुरक्षित रखा गया है। फिलहाल कर देनदारियों का हिसाब-किताब लगाया जा रहा है। असल में चर्चा थी कि विभाग ने जब्त रकम को टर्नओवर मानते हुए आरोपी को कर बकाया के रूप में 52 करोड़ रुपये जमा करने की अनुमति दी है।
अपराध को स्वीकार करने और सुबूतों के आधार पर पीयूष जैन को सीजीएसटी अधिनियम की धारा 132 व 67 के तहत 26 दिसंबर को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 27 दिसंबर को अदालत ने जैन को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं जैन के अधिवक्ता सुधीर मालवीय ने बताया कि एक जनवरी को अदालतों के खुलते ही जमानत की अर्जी लगाई जाएगी।
पान मसाला कंपनी व ट्रांसपोर्टर से रिश्तों की जांच शुरू
इत्र कारोबारी जैन के कानपुर और कन्नौज स्थित आवासों से मिली 197 करोड़ की नकदी को सीज कर डीजीजीआई ने शिखर पान मसाला के मालिक प्रदीप अग्रवाल, ट्रांसपोर्टर प्रवीण जैन से उसके रिश्तों की जांच शुरू कर दी है। बीते वर्षों के दौरान इनके बीच हुए कारोबार की जानकारी जुटाई जा रही है। एजेंसी यह पता कर रही है कि इनके बीच कितने साल से कारोबार चल रहा है, ट्रांसपोर्टर की इसमें क्या भूमिका है, कितने ट्रकों से कर चोरी या कैश इधर-उधर किया जा रहा था?
डीजीजीआई (महानिदेशालय जीएसटी इंटेलिजेंस) अहमदाबाद की टीम ने 22 दिसंबर को तीनों के ठिकानों पर एक साथ छापा मारा था। कंपाउंड, पान मसाला और ट्रांसपोर्ट का एक-दूसरे से सीधा संबंध है। इस कारोबार में सबसे ज्यादा कर चोरी की संभावना होती है। इस मामले में भी बड़े पैमाने पर कर चोरी पकड़ी है।