तीन से एक हुई एमसीडी की सत्ता पर अब आम आदमी पार्टी का कब्जा है। अब नए नेतृत्व के पास खाली खजाने के साथ एमसीडी को बेहतर ढंग से चलाने की मुश्किल चुनौती भी है। मौजूदा समय में निगम के कुल बजट का करीब 72 फीसदी हिस्सा कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होता है। ऐसे में बचा हुआ 28 फीसदी बजट निगम के महत्वपूर्ण विकास कार्यों के लिए पर्याप्त नहीं है।
सफाई के अलावा शिक्षा व स्वास्थ्य का भी जिम्मा
दिल्ली का 97 फीसदी इलाका एमसीडी क्षेत्र में आता है। तीन फीसदी इलाका नई दिल्ली नगर पालिका परिषद और दिल्ली कन्टोनमेंट बोर्ड के अंतर्गत आता है। एमसीडी क्षेत्र की आबादी करीब दो करोड़ है। इस प्रकार दुनिया का सबसे बड़ा निगम है, जो शहर की सफाई के अलावा 1535 प्राइमरी स्कूल और 10 अस्पताल चलाता है। हजारों पार्कों का रखरखाव करता है। दिल्ली सरकार से ज्यादा सड़कें एमसीडी के पास हैं, जिनका रखरखाव, स्ट्रीट लाइटें लगाने की जिम्मेदारी इसी की है। इन पर खर्च करने के लिए निगम का मौजूदा बजट पर्याप्त नहीं है। एमसीडी सफाई कर्मचारियों के वेतन पर सर्वाधिक खर्च करती है, दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा स्कूल कर्मचारियों के वेतन व इनके रखरखाव पर खर्च होता है।
जरूरत के मुताबिक कम है एमसीडी का बजट
एकीकरण के बाद एमसीडी ने 2022-23 के लिए 15267 करोड़ रुपये का बजट जारी किया था। एमसीडी प्रशासन ने अलग वित्त वर्ष का बजट भी तैयार कर लिया है। इसे जल्द सार्वजनिक किया जाएगा। एमसीडी अधिकारियों के मुताबिक मौजूदा बजट पिछले बजट के आसपास ही है। सदन की पहली बैठक में एमसीडी का यह नया बजट आने की उम्मीद है। इसके बाद नया नेतृत्व इसमें फेरबदल कर सकता है।