पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी में हुए भीषण हादसे के बाद अब मलबे के ढेर पर केवल तबाही के निशान और पीड़ितों की बेबसी दिखाई दे रही है। बुधवार को जो आंखें अपनों की सलामती और उनके शवों की तलाश में पथरा गई थीं बृहस्पतिवार को वही आंखें अपने आशियाने के बचे-कुचे सामान और जिंदगी भर की कमाई को ढूंढ़ती नजर आईं।
हादसे का शिकार हुए मकान के मलबे में बिखरी पड़ी चीजों के बीच लोग अपनी यादें, जरूरी दस्तावेज और कीमती सामान तलाशते रहे, लेकिन निराशा और प्रशासनिक पाबंदियों के सिवा उनके हाथ कुछ नहीं लग पाया।
हादसे के वक्त तीसरी मंजिल पर किराए पर रहने वाली मुस्लिमा का दर्द झलक पड़ा। उन्होंने बताया कि जिस वक्त राहत और बचाव कार्य चल रहा था उस दौरान उन्हें मलबे से अपना सामान निकालने नहीं दिया गया।
मुस्लिमा के अनुसार मलबे के नीचे उनकी अटैची दबी हुई है जिसमें सोने के जेवर और मेहनत की कमाई की नकदी रखी थी। बुधवार की रात तक कुछ सामान दिखाई दे रहा था लेकिन बचाव कार्य के दौरान हुए फेरबदल और सुरक्षा कारणों से अब सब कुछ मलबे के नीचे दब चुका है।
जरूरी दस्तावेजों के बिना भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता
पहली मंजिल पर रहने वाली अपनी बहन सलमा और रिश्तेदारों की मदद के लिए पहुंचे नूर भी सुबह से मलबे के आसपास चक्कर काट रहे हैं। नूर ने बताया कि मकान ढहने से उनकी बहन का पूरा घर तबाह हो गया है। मलबे के भीतर अटैची में नकदी के साथ-साथ कई बेहद जरूरी दस्तावेज भी दबे हुए हैं जिनके बिना आगे का जीवन पटरी पर लाना आसान नहीं होगा।
पीड़ितों का कहना है कि सामान इधर-उधर बिखरा पड़ा है लेकिन प्रशासन उन्हें वहां जाने से रोक रहा है। लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों पर सहयोग न करने और उनकी मजबूरी को न समझने का आरोप भी लगाया है।
स्थानीय लोग बढ़ा रहे मदद के हाथ, समस्याओं का नहीं मिल रहा समाधान
हादसे के बाद से ही स्थानीय नागरिक प्रभावित परिवारों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। पास ही रहने वाले वसीम ने बताया कि वह सुबह से ही पीड़ित लोगों के सामान को सुरक्षित बाहर निकलवाने में मदद कर रहे हैं। हालांकि मलबा हटाने की प्रक्रिया के बीच लोगों का सामान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है और इधर-उधर फैल चुका है। अपनों को खोने का गम झेल रहे इन परिवारों के लिए अब रोजी-रोटी और पहचान से जुड़े दस्तावेजों को बचाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।
बचाव कार्य के दौरान ही सामान दिख रहा था, लेकिन सुरक्षा बलों ने हमें पास नहीं जाने दिया और अब सारा सामान मलबे के नीचे दब चुका है।- मुस्लिमा, पीड़िता
बहन का पूरा संसार मलबे में दफन हो गया है, नकदी और जरूरी पहचान पत्र निकालने के लिए हम सुबह से प्रशासन के सामने मिन्नतें कर रहे हैं।-नूर, पीड़ित का रिश्तेदार
लोग बहुत ज्यादा परेशान हैं और अपने बचे-कुचे सामान को सुरक्षित निकालने के लिए सुबह से संघर्ष कर रहे हैं, इसलिए हम उनकी मदद में लगे हैं।- वसीम, स्थानीय निवासी
पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी इमारत हादसे में जान गंवाने वाले मासूमों और महिलाओं की मौत के बाद जीटीबी अस्पताल परिसर में दिनभर चीख-पुकार और मातम का माहौल बना रहा। शुक्रवार देर शाम पुलिस और डॉक्टरों की टीम ने आवश्यक कागजी कार्रवाई और पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी करने के बाद मृतका गुलअफ्शां और उसकी मासूम बेटी जोया के शव परिजनों को सौंप दिए।
इससे पहले हादसे में जान गंवाने वाली हाजिरा और नुसरत के शवों का गुरुवार देर शाम पोस्टमॉर्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया गया था। दोनों को देर रात गमगीन माहौल में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। वहीं, हादसे में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई एक कथित 12 वर्षीय बच्ची के शरीर के अंगों को शिनाख्त और पहचान से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक मोर्चरी में सुरक्षित रखवाया गया है।
अस्पताल की मोर्चरी के बाहर बदहवास हालत में बैठीं मृतका गुलअफ्शां की मां शायरा बानो ने बताया कि वह अपने पति, बेटी की फूफी नूर बानो और अन्य रिश्तेदारों के साथ सुबह करीब आठ बजे ही जीटीबी अस्पताल पहुंच गई थीं। दिनभर लंबे और थका देने वाले इंतजार के बाद शाम करीब पांच बजे मां-बेटी के शव परिजनों को मिल सके।
बिलखते परिजनों ने बताया कि पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी गुलअफ्शां अपनी बेटी जोया के साथ पिछले कुछ समय से मायके में रह रही थी। उसकी तीन बहनों और एक भाई सद्दाम की शादी हो चुकी है।
घटना के वक्त की खौफनाक यादें साझा करते हुए परिजनों ने बताया कि रोजाना की तरह गुलअफ्शां के माता-पिता मजदूरी और अन्य काम के लिए घर से बाहर गए हुए थे। गुलअफ्शां अपनी बेटी को लेकर सड़क किनारे खड़ी थी। तभी अचानक जर्जर इमारत का भारी-भरकम हिस्सा ताश के पत्तों की तरह भरभराकर गिर पड़ा।
मां-बेटी को संभलने तक का मौका नहीं मिला और दोनों मलबे के नीचे दब गईं। स्थानीय लोगों की मदद से जब तक उन्हें मलबे से बाहर निकाला गया, तब तक काफी देर हो चुकी थी। इस घटना से पूरे इलाके में शोक की लहर है।
मृतकों की संख्या पांच हुई, बृहस्पतिवार तड़के मिले दो और महिलाओं के शव
पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी इलाके में बुधवार की दोपहर चार मंजिला इमारत के गिरने के मामले में मृतकों की संख्या अब पांच हो गई है। बृहस्पतिवार तड़के राहत और बचाव कार्य के दौरान दो महिलाओं के शव मलबे से बरामद हुए। मलबा हटाने के दौरान बुधवार रात को ही घटनास्थल से कुछ शवों के अवशेष बुरी तरह कुचले मिले हैं। माना जा रहा कि यह बाकी मृतकों के अवशेष हो सकते हैं।
पुलिस ने इनको मलबे से निकालकर मोर्चरी में सुरक्षित रखवा दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डीएनए परीक्षण से ही इनकी पहचान कर पाना संभव है। एरिया का जो भी व्यक्ति अपनों की तलाश में सामने आएगा, उसके आधार पर डीएनए से पहचान के प्रयास होंगे। फिलहाल अभी चार मृतकों की ही शिनाख्त हो पाई है।
इनमें मकान मालिक अनवर की बेटी नुसरत उर्फ गुड़िया (33), अनवर की बहन हाजरा बीबी (56), गर्भवती महिला गुलअफशां (22) और उसकी चार साल की बेटी जोया शामिल है। जोया का शव भी मलबे में बुरी तरह कुचला हुआ मिला है। उसके शरीर का कुछ ही हिस्सा मिल पाया था।
इसके आधार पर पुलिस जोया की भी आधिकारिक पहचान नहीं कर रही है। पुलिस जोया की पहचान के लिए गुलअफशा या उसके परिवार से मिलान कराने के लिए डीएनए परीक्षण करवाएगी। फिलहाल बृहस्पतिवार को पुलिस ने नुसरत और हाजरा बीबी के शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के हवाले कर दिए हैं। दूसरी ओर अस्पताल में घायलों का इलाज जारी है।
शुक्रवार को गुलअफशां और उसकी बेटी के शव का पोस्टमार्टम होगा। वहीं दूसरी ओर 12 साल की जिस लड़की का शव बुधवार को बरामद हुआ था, उसकी भी अभी पहचान नहीं हो पाई है। उसकी पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस ने बृहस्पतिवार अनवर के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस किया है।