याची के वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट का दिया हवाला
याची की और से पेश अधिवक्ता पुनीत बाली ने तर्क दिया कि दिल्ली उच्च न्यायालय के पास इस मुद्दे पर सुनवाई का अधिकार क्षेत्र है, क्योंकि केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) द्वारा मंजूरी आदेश पारित किया गया था जो दिल्ली में स्थित है। उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ का 2009 के एक निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे में उसे मामले से निपटने का अधिकार है, और उस निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय ने बरकरार रखा है।
पीठ ने याची के अधिवक्ता को अगले सोमवार तक उक्त फैसले की प्रतियां और अन्य सामग्री रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश देते हुए कहा उसका अध्ययन करने के बाद वे मामले पर अगली सुनवाई का विचार करेंगे। एमएचए ने पिछले साल सितंबर में मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास विस्फोटकों से लदी कार बरामद होने के साथ-साथ ऑटो-पार्ट्स डीलर हिरेन मनसुख की हत्या के सिलसिले में वाजे के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी।