उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में ताहिर हुसैन को अपनी ही सफाई भारी पड़ गई। कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह के फैसले में सबसे अहम बात यह रही कि ताहिर हुसैन ने अपने घर की छत पर दंगाइयों की भीड़ मौजूद होने की बात को साफ तौर पर नहीं नकारा।
हुसैन ने दावा किया कि भीड़ जबरन घर में घुस आई थी, लेकिन अपने बचाव में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सके। वहीं, चार सार्वजनिक गवाहों की गवाही को अहम मानते हुए अदालत ने ताहिर के खिलाफ फैसला सुनाया। दूसरी ओर, पुलिस गवाहों के बयानों में खामियों के चलते नौ आरोपी को राहत मिल गई।
न्यायाधीश ने कहा कि घटना के दिन 24 फरवरी 2020 को मुख्य करावल नगर रोड पर ताहिर हुसैन के घर की छत पर दंगाइयों की भीड़ मौजूद थी। इस भीड़ ने ऊपर से राहगीरों और आसपास की दुकानों-संपत्ति पर पत्थर फेंके। चार सार्वजनिक गवाह चश्मदीद जगदीश प्रसाद, उमेश कुमार शर्मा, वीरेंद्र कुमार और सुरेंद्र पाल सिंह ने लगातार यही बात कही।
इन गवाहों से सरकारी वकील ने भी पूछताछ की, लेकिन उनकी गवाही नहीं टूटी। खास बात यह रही कि इनमें से किसी भी गवाह ने ताहिर हुसैन को भीड़ में शामिल नहीं बताया। अदालत ने इसे गवाहों का निष्पक्ष होना माना।
ताहिर ने कहा, भीड़ जबरन घुसी थी
जब अदालत ने ताहिर हुसैन से धारा 313 के तहत पूछा कि उनके घर की छत पर दंगाई भीड़ थी और वहां से पत्थरबाजी हो रही थी, तो उन्होंने इस तथ्य को साफ तौर पर नकारा नहीं। उन्होंने कहा कि भीड़ ने जबरन उनके घर में घुसकर कब्जा कर लिया था, वे रोक नहीं सके और उन्होंने पीसीआर कॉल भी की थीं। लेकिन, अदालत ने कहा कि सिर्फ बयान देना सबूत नहीं होता।
उन्होंने अपने बचाव में कोई ठोस सबूत अदालत में पेश नहीं किया, न ही खुद गवाही देने आए। ऐसे में अदालत ने माना कि उन्होंने दंगाइयों को अपनी छत का इस्तेमाल करने दिया, जो दंगा भड़काने में मदद के बराबर है।
दिल्ली दंगा मामला: दंगा भड़काने के मामले आप के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन दोषी करार, सात अन्य आरोपी बरी
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 2020 में हुए दंगों से जुड़े एक मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दंगा भड़काने के अपराध में दोषी ठहराया है। हालांकि, अदालत ने उसे अन्य आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने सात अन्य आरोपियों को भी सभी आरोपों से बरी कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने शनिवार को यह फैसला सुनाया। बरी आरोपियों में मोहम्मद शादाब, शाह आलम, रियासत अली, गुलफाम, मोहम्मद रिहान, अरशद कय्यूम और इरशाद अहमद शामिल हैं। अदालत ने हुसैन को सुनाई जाने वाली सजा की अवधि पर बहस के लिए मामले की सुनवाई 16 नवंबर को तय की है।
यह मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दयालपुर थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 120/2020 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता इरशाद अली ने आरोप लगाया था कि 24 फरवरी 2020 को दंगाइयों ने उस दुकान का शटर तोड़ दिया, जहां वह काम करते थे। दुकान में लूटपाट की गई और आग लगा दी गई। शिकायत के अनुसार, दुकान से सामान लूटे जाने के कारण करीब 17 से 18 लाख का नुकसान हुआ, जबकि इमारत को नुकसान पहुंचने से लगभग 10 लाख की क्षति हुई। एक अन्य शिकायतकर्ता मोहम्मद जाहिद ने आरोप लगाया था कि दंगाई ताहिर हुसैन के नाम के नारे लगा रहे थे और उनके साथ होने की बात कह रहे थे।
दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में भी दोषी
ताहिर हुसैन को दिल्ली दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में भी दोषी ठहराया जा चुका है। उस मामले में उन्हें इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या का दोषी ठहराया गया था और उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। मौजूदा मामले में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की दंगा, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, आगजनी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। अदालत के इस फैसले में ताहिर हुसैन को दंगा भड़काने के अपराध में दोषी माना गया, जबकि अन्य आरोपों से उन्हें राहत दी गई।
कौन है ताहिर हुसैन
ताहिर हुसैन ने 2017 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर पार्षद का चुनाव जीतकर पार्षद बना। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमरोहा स्थित पौरारा गांव का रहने वाला है। पांच भाइयों में ताहिर सबसे बड़ा है। 2017 के चुनावी हलफनामे में उसने 18 करोड़ की घोषित संपत्ति थी। 2020 के दिल्ली दंगों में ताहिर का नाम आया। दंगों में ताहिर का नाम आने के बाद आम आदमी पार्टी ने उसे पार्टी से निष्कासित कर दिया।
क्या था मामला
वर्ष 2020 में नागरिकता संशोधन कानून के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा के बाद 24 फरवरी, 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें हुईं, जिसमें कम से कम 53 लोग मारे गए और कई घायल हो गए थे। इसी दौरान जब अंकित शर्मा आरोपियों को शांत करने और उनसे कानून हाथ में नहीं लेने का आग्रह कर रहे थे। तभी उन्हें पकड़ लिया गया और उनकी जान लेने के बाद शव नाले में फेंक दिया गया था।
ताहिर हुसैन दंगा मामला: घटनाक्रम
- 23 फरवरी 2020: नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थन और विरोध में प्रदर्शनों के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली में तनाव बढ़ा।
- 24 फरवरी 2020: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा के दौरान आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं हुईं। इरशाद अली की शिकायत के मुताबिक, उनकी दुकान को भी निशाना बनाया गया।
- 25 फरवरी 2020: हिंसा से जुड़े मामले में पुलिसकर्मियों और गवाहों ने ताहिर हुसैन की भूमिका को लेकर आरोप लगाए।
- 26 फरवरी 2020: दुकान में लूटपाट और आगजनी की शिकायत पुलिस तक पहुंची।
- 4 मार्च 2020: दयालपुर थाने में दुकान में लूटपाट और आगजनी के मामले में एफआईआर नंबर 120/2020 दर्ज की गई।
- 21 अप्रैल 2020: ताहिर हुसैन को मंडोली जेल में इस मामले में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। वह पहले से दूसरे दंगा मामले में न्यायिक हिरासत में थे।
- 12 जुलाई 2023: दिल्ली हाईकोर्ट ने दयालपुर थाने की पांच एफआईआर से संबंधित ताहिर हुसैन की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाया।
- 10 अक्तूबर 2026: ताहिर हुसैन को दंगा भड़काने के अपराध में दोषी ठहराया और अन्य आरोपों से बरी किया।