कड़कड़डूमा कोर्ट ने दिल्ली दंगों के एक मामलों में चार आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि सभी साक्ष्यों व गवाहों के बयानों से स्पष्ट है कि अभियोजन पक्ष आरोपियों का अपराध साबित करने में असफल रहा है। इतना ही नहीं चश्मदीद गवाह भी अपने बयानों से मुकर गए।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमचला ने अपने फैसले में कहा टिप्पणियों और निष्कर्षों के मद्देनजर पाया कि इस मामले में आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए आरोप संदेह से परे साबित नहीं होते हैं। इसलिए आरोपी मो. शाहनवाज शानू, मो. शोएब उर्फ छुटवा, शाहरुख और राशिद उर्फ राजा को इस मामले में अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से बरी किया जाता है। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता ने भी कहा है कि उनकी दुकानों में भीड़ ने आगजनी की लेकिन उन्होंने आरोपियों को नहीं देखा था। शिकायतकर्ता ने कहा कि वह दुकान पर गया और दुकान का शटर टूटा और जली हुई अवस्था में पाया।
साजिश के मामलों में जमानत पर लगेगा समय
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दंगों के पीछे बड़ी साजिश का तर्क रखते हुए एक मामले में आरोपी द्वारा स्थानांतरित की गई जमानत याचिका पर सुनवाई को स्थगित करते हुए शुक्रवार को कहा कि व्यक्तिगत अपीलों में निर्णय लेने में लंबा समय लगने की संभावना है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की विशेष पीठ अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 नवंबर को करेगी ताकि यह तय किया जा सके कि भविष्य में जमानत याचिकाओं पर कैसे सुनवाई होगी। हमें फैसला करना होगा, इसमें काफी समय लगने की संभावना है और हम किसी भी तरह से किसी भी अपीलकर्ता को कम नहीं करना चाहेंगे। इन सभी अपीलों पर हर शुक्रवार को सुनवाई करें। हम नहीं जानते कि हम इन सभी को कब समाप्त कर पाएंगे। पीठ ने हाल ही में उमर खालिद की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था, अन्य सह-आरोपी व्यक्तियों द्वारा दायर याचिकाओं पर भी सुनवाई स्थगित कर दी थी जिसमें दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ द्वारा जांच में जमानत की मांग की गई है।