प्रदर्शन को बिखेरना, प्रदर्शनकारियों को भटकाना और जहां भी नारेबाजी शुरू हुई, वहां तत्काल हिरासत में लेना... शनिवार को दिनभर सीजेपी से निपटने की दिल्ली पुलिस की रणनीति इसी तरह की दिखी। मेट्रो, रेल समेत सड़क पर पहरा लगाकर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग दिशाओं में बांट दिया। बावजूद इसके जो प्रदर्शनकारी जंतर मंतर के नजदीक पहुंचकर नारेबाजी करते, उनको तुरंत हिरासत में लेकर दूर भेज दिया। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के जुटान को नाकाम कर पुलिस अपनी रणनीति में कामयाब होती दिखी।
शनिवार पुलिस की तैयारी जंतर-मंतर तक सीमित नहीं रही। आवाजाही के रास्तों पर बंदिशों और सख्त बैरिकेडिंग ने प्रदर्शनकारियों की मुश्किलें बढ़ाईं। बंद रास्तों के बीच वैकल्पिक मार्ग तलाशने में भी असमंजस रहा। कुछ जगह गूगल मैप पर दिखाए जा रहे रास्तों को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी। ब्यूरो
आज भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
यूजीसी के नए नियमों और आरक्षण की नीतियों के विरोध में रविवार को जंतर-मंतर पर सवर्ण समाज की ओर से प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। यह प्रदर्शन पंकज धौरैया के नेतृत्व में निकाली गई सवर्ण जगाओ, भारत बचाओ पैदल यात्रा के समापन पर होगा। यह यात्रा 13 सितंबर को शुरू हुई थी। सवर्ण समाज ने देशभर के सवर्ण समाज के लोगों से बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की है। आयोजकों की प्रमुख मांगों में यूजीसी के नए इक्विटी नियमों को वापस लेना, एससी-एसटी कानून में बदलाव करना और आरक्षण की नीतियों की समीक्षा करना शामिल है। उनकी मांग है कि आरक्षण का आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति को बनाया जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को इसका लाभ मिल सके। पैदल यात्रा के समापन पर होने वाले इस प्रदर्शन के जरिये आयोजक इन मांगों को उठाएंगे।