उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराध भी बढ़ रहे हैं और फॉरेंसिक लेखाकार विशेषज्ञों की नियुक्ति की जा रही है ताकि ऐसे अपराधों की जांच की क्षमता बढ़ाई जा सके। श्रीवास्तव ने रेखांकित किया कि पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) धोखाधड़ी और बैंक से गबन जैसे जटिल मामलों की जांच करती है और ऐसे मामलों में जटिल एवं भारी-भरकम दस्तावेजों की जांच करनी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि आम तौर पर पुलिसकर्मी वित्तीय दस्तावेजों की जांच के लिए प्रशिक्षित नहीं होते हैं, ऐसे में आपको ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है जो प्रशिक्षित हो ताकि जांच की गुणवत्ता में सुधार हो और अभियोजन पुख्ता किया जा सके।
संयुक्त पुलिस आयुक्त (ईओडब्ल्यू) ओपी मिश्रा ने कहा कि आर्थिक अपराधों की जांच बहुत अधिक दस्तावेज आधारित होती है, बैंक दस्तावेजों एवं अन्य संबंधित कागजात का फॉरेंसिक लेखा परीक्षण जांच का सामान्य हिस्सा होता है।
उन्होंने कहा, आम तौर पर हमारे पास संबंधित दस्तावेजों का विश्लेषण करने के लिए लेखापरीक्षक होते हैं। हमारे पैनल में चार्टर्ड अकाउंटेंट होते हैं और वे भी विश्लेषण करते हैं। इसलिए अगर हमें फॉरेंसिक लेखा परीक्षक फॉरेंसिक लेखांकन के लिए मिल जाएं तो जांच को गति देने के लिए पेशेवर कुशलता हासिल हो जाएगी।