नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की अपराध शाख को अंदेशा है कि कोरोना के इलाज से जुड़े जीवन रक्षक इंजेक्शन रेमडेसिविर को ब्लैक में बेचने के पीछे एक पूरा गिरोह हो सकता है। पुलिस को इस गिरोह से जुड़े कुछ और लोगों का पता लगा है जो इस कालाबाजारी से जुड़े हुए थे। अपराध शाखा की पुलिस टीम मंगलवार को चांदनी चौक समेत कई जगहों पर दबिश दे रही थी। उम्मीद है जल्द ही कुछ और लोग पकड़े जाएंगे।
अपराध शाखा के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी बसंत गोयल के गोयल मेडिकल स्टोर से छापे में एक भी रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिला है। सवाल ये खड़ा होता है कि आखिर मेडिकल स्टोर से इंजेक्शन क्यों नहीं मिला। पुलिस को शुरुआती जांच में पता लगा है कि वह इंजेक्शन कहीं और से लाकर ब्लैक में बेचता था। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इंजेक्शन कहां से लेकर आता था।
पुलिस टीम ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने के आरोप में दुर्गा पुरी स्थित गोयल मेडिकल स्टोर के मालिक बसंत गोयल (41) और उसके कर्मचारी रामोअबतार शर्मा (27) को सोमवार को गिरफ्तार किया था। आरोपियों ने खुलासा किया था कि वह 60 से ज्यादा रेमडेसिविर इंजेक्शन ब्लैक में बेच चुके हैं। ये पांच हजार रुपये के एक इंजेक्शन को 19 से 20 हजार में बेच रहा थे। पुलिस ने दोनों को सोमवार शाम को ही कोर्ट में पेश कर दो दिन का रिमांड लिया है।