दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने पत्नी की हत्या के आरोपी पति को 25 साल बाद गिरफ्तार किया है। दाेषी ने 1992 में अपनी पत्नी की हत्या गला घोंटकर कर दी थी। दाेषी पेरोल मिलने के बाद फरार हो गया था।
गिरफ्तारी से बचने के लिए दाेषी ने अपना नाम, पिता का नाम और रहने का पता बदल लिया था। फिलहाल वह पंजाब के लुधियाना में एक नई पहचान के साथ रहता था। वह पिछले 25 साल में हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और कर्नाटक में घूमकर गिरफ्तारी से बचता रहा और आखिरकार पंजाब के लुधियाना में बस गया। अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त संजीव कुमार यादव के अनुसार 15 मार्च, 1992 को सुबह लगभग 7.15 बजे विनय नगर पुलिस स्टेशन (अब सरोजिनी नगर) दिल्ली को गांव पिलंगी से सूचना मिली थी।
मकान मालिक के भाई ने पुलिस को बताया कि आरोपी योगिंदर पत्नी की हत्या कर भाग रहा है। मकान मालिक के भाई की मदद से आरोपी का पीछा कर उसे पकड़ लिया गया। मौके पर पत्नी का शव घर में एक गद्दे पर मिला, उसकी बाईं आंख के पास चोट के निशान थे।डाक्टरों ने बताया कि सभी चोटें मौत से पहले की थीं और मौत का कारण गला दबाना था। जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दायर की गई और 6 मार्च, 1997 को आरोपी योगिंदर को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट की सेशन कोर्ट ने दोषी ठहराया और 10,000 रुपये के जुर्माने के साथ उम्रकैद की सजा सुनाई।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 3 जून,2000 को उसे चार हफ्ते के लिए पेरोल पर रिहा कर दिया था, मगर आरोपी ने बाद में सरेंडर नहीं किया था। वर्ष 2010 में उसकी अपील खारिज कर दी गई और दिल्ली हाई कोर्ट ने सजा और फैसले को बरकरार रखा। हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद आरोपी को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट की सेशंस कोर्ट ने भगोड़ा अपराधी भी घोषित कर दिया था। दिल्ली पुलिस की टीम 10 दिनों से ज़्यादा समय तक लुधियाना पंजाब में रही और आरोपी का बारीकी से पता लगाया, जो आखिरकार वहां एक बढ़ई के रूप में काम करता हुआ मिला।