पुलिस के अनुसार, आरोपी एक अस्थायी सड़क किनारे टेलीकॉम आउटलेट चला रहा था। वह ग्राहकों की जानकारी के बिना उनके पहचान संबंधी दस्तावेज और बायोमीट्रिक विवरण का दुरुपयोग करता था। इन विवरणों का उपयोग कर वह अतिरिक्त सिम कार्ड एक्टिवेट करता था। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांच खुफिया सूचनाओं से शुरू हुई थी। सूचना मिली थी कि दिल्ली के कुछ पीओएस एजेंटों द्वारा जारी सिम कार्ड साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल हो रहे हैं।
18 ठगी के मामलों से जुड़ा कनेक्शन
जांच में तीन रिटेल आउटलेट संदेह के दायरे में आए। शिवम टेलीकॉम के जरिये एक्टिवेट किए गए 11 सिम कार्ड 18 साइबर धोखाधड़ी के मामलों में पाए गए। ये मामले देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज हुए थे। पूछताछ में शिवा ने स्वीकार किया कि वह एक्टिवेट किए गए सिम कार्ड बिचौलियों को बेचता था। वह प्रति सिम 500 से 600 रुपये लेता था।
आगे की जांच जारी
पुलिस के अनुसार, आरोपी शिवा के खिलाफ पहले से एक आपराधिक मामला दर्ज है। पुलिस अब उन बिचौलियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। नेटवर्क के अन्य सदस्यों की भी पहचान की जा रही है। ये सभी फर्जी तरीके से एक्टिवेट किए गए सिम कार्डों की खरीद और आपूर्ति में शामिल थे। मामले की आगे की जांच अभी जारी है।