योजना के तहत फ्लैट लेने के लिए आवेदन करने की अवधि 10 मार्च को समाप्त हो गई थी। करीब ढाई माह के दौरान 22,179 लोगों ने आवेदन किया। खास बात यह है कि 22,179 आवेदनों में से केवल 12,400 आवेदनों का ही आवश्यक भुगतान बैंकों में जमा कराया गया।
दूरदराज व खराब होने के कारण लोग नहीं ले रहे फ्लैट
डीडीए के अधिकतर फ्लैट नई दिल्ली इलाके से काफी दूर है और उनकी स्थिति भी खराब हो चुकी है। डीडीए के अधिकतर फ्लैट द्वारका, मंगलापुरी, बक्करवाला, रोहिणी, नरेला, जसोला, वसंत कुंज आदि जगह हैं। इसके अलावा नरेला, बक्करवाला, रोहिणी में वीरान जगह पर फ्लैट बने हुए हैं। इन स्थानों पर न तो बस सेवा है और न ही मार्केट है। इतना ही नहीं, रात ही नहीं, बल्कि दिन में भी वारदात होने का खतरा रहता है।
पहले भी विफल हो चुकी है डीडीए की योजना
डीडीए ने वर्ष 2014 में करीब 25 हजार फ्लैट आवंटित करने की योजना जारी की थी। करीब दो लाख लोगों ने फ्लैट लेने के लिए आवेदन किया था, लेकिन ड्रा निकलने के करीब दो माह के अंदर 11 हजार लोगों ने फ्लैट लौटा दिए। वर्ष 2017 में 13 हजार फ्लैट आवंटित करने का निर्णय लिया था। छह हजार लोगों ने फ्लैट लौटा दिए थे। वर्ष 2019 में 8,400 फ्लैट्स शामिल किए गए थे, लेकिन ड्रा निकलने के 20 दिन के अंदर ही 4,000 हजार लोगों ने फ्लैट्स लौटाने का आवेदन कर दिया था। वर्ष 2021 में 1,354 फ्लैट्स थे और उनमें से 694 फ्लैट्स सरेंडर कर दिए गए थे।