दिल्ली के प्रदूषण के लिए अन्य कारकों के साथ इसकी भूगौलिक स्थिति भी जिम्मेदार है। चारों ओर से जमीन से घिरे(लैंडलॉक्ड) होने की वजह से यहां हर वर्ष प्रदूषण के कारण लोगों की सांसों पर संकट खड़ा हो जाता है। यही वजह है कि राजधानी की गिनती देश के सबसे प्रदूषित शहरों में होती है। रही सही कमी पूरे वर्ष सड़कों पर उड़ने वाली धूल, कचरा से जलने से उत्पन्न होने वाले जहरीले पदार्थ व अन्य कारक पूरी कर देते हैं।
दिल्ली अपने सभी पड़ोसियों राज्यों से घिर हुए क्षेत्र में स्थित है। इसके चारों हरियाणा व उत्तरप्रदेश की सीमाएं फैली हुई हैं। इस वजह से यहां बड़े जलाशयों की भी कमी है। नदी के नाम पर यमुना है, लेकिन नदी अब नाले के रूप ले सकी है। दूसरी ओर शहर की बनावट के कारण यहां हवा भी पूरी तरह से पास नहीं होती है। यही वजह है कि पश्चिम दिशा से आने वाली धूल भरी आंधी के कण और प्रदूषण दिल्ली में ही जमा रहता है और यहां के प्रदूषित तत्वों के साथ सांसों पर संकट जन्म ले लेता है।
हवा की दिशा बदलने से पड़ता है प्रभाव
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अपर निदेशक डॉ. सुशील कुमार त्यागी ने बताया कि दिल्ली में गर्मी के दिनों में पश्चिम की ओर से हवाएं चलती हैं। यही वजह है कि राजस्थान से आने वाली धूलभरी आंधी के साथ पीएम 10 व पीएम 2.5 कण दिल्ली में डेरा डाले रहते हैं। वहीं, इसके उलट सर्दी में हवा की दिशा उत्तर-पश्चिम की ओर हो जाती है। उस समय पंजाब व हरियाणा में जलने वाली पराली का धुआं दिल्ली की ओर रख करता है। वहीं, वेंटिलेशन इंडेक्स कम होने के से भी सांसों का अधिक संकट हो जाता है।
दिल्ली के लिए ईको सिस्टम अधिक महत्वपूर्ण
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अपर निदेशक रह चुके डॉ. दीपांकर साहा कहते हैं दिल्ली जैसे भूगोलिक क्षेत्र के लिए ईको सिस्टम का भी बेहतर रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में भूमि दोहन अधिक हो रहा है। यही वजह है कि यहां का ईको सिस्टम भी गड़बड़ है। इसे बचाने के लिए मानव जाति को जल संरक्षण, जीव जंतुओं की रक्षा, कचरे का कम उत्पादन व ई मोबिलीटी पर जोर देना होगा। इन सभी कारकों अपनाकर दिल्ली के ईको सिस्टम को बेहतर किया जा सकता है।