गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलनरत किसान नेता राकेश टिकैत ने बुधवार को पौधों को सींचकर आंदोलन को धार दी। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। वहीं, आगामी माह में यहां पर होलिका दहन भी किया जाएगा। इसके लिए सभी किसान सहयोग देंगे।
दरअसल, बॉर्डर पर ही सड़क किनारे आलू व गन्ने की बुवाई के साथ अन्य पौधे लगाए हैं। किसानों ने यहां पर सुंदर पार्क विकसित करने की भी बात पूर्व में कही थी। बुधवार को किसान नेता राकेश टिकैत यहां पर पौधों को पानी देने के लिए पहुंचे। इस दौरान अन्य किसान नेताओं ने भी उनका सहयोग किया।
बनाए गए ट्विटर अकाउंट
बॉर्डर पर बुधवार को अखिल भारतीय छात्र संगठन ने लोगों के ट्वीटर अकाउंटर भी बनाए। संगठन से जु़ड़े सदस्य संदीप ने बताया कि किसानों की मदद के लिए संगठन ने शिविर लगाया है। एक दिन में करीब 25 ट्वीटर अकाउंट बनाए गए हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर आने वाली परेशानियों के संबंध में भी लोगों की मदद की गई है। उन्होंने कहा कि आगे भी यह शिविर जारी रहेगा व लोगों को सोशल मीडिया पर सक्रिया किया जाएगा।
लगाए गए सीसीटीवी कैमरे व शौचालय
बॉर्डर पर बुधवार को सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे व स्वच्छता के लिए शौचालय लगाए गए हैं। आंदोलन में मौजूद किसान बालवीर ने कहा कि सुरक्षा को देखते हुए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। कैमरों के माध्यम से असामाजिक तत्वों पर भी नजर रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी कई असामाजिक तत्वों ने आंदोलन के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की है। इसको देखते हुए बॉर्डर पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। वहीं, एक अन्य किसान लखन सिंह ने कहा कि प्रशासन की ओर से साफ-सफाई बेहतर न होने की वजह से गंदगी की आलम बढ़ गया है। इसको देखते हुए अतिरिक्त संख्या में प्लास्टिक के बने मूवेबल शौचालयों का लाया गया है। सुबह-शाम यहां पर सफाई पर भी जोर दिया जा रहा है जिससे गंदगी से उत्पन्न होने वाली बीमारियों से बचा जा सके।
गोरखपुर से गले में लिट्टी की माला डाल पहुंचे गाजीपुर
किसानों के समर्थन में गोरखपुर से गले में लिट्टी की माला डाल संजय यादव गाजीपुर पहुंचे हैं। वह इन दिनों बॉर्डर पर आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। संजय ने कहा कि वह गत पांच तारीख को यहां पहुंचे थे, लेकिन कुछ कार्य की वजह से कुछ दिनों के लिए वापस लौट गए थे। अब दोबारा गले में लिट्टी की माला डाल यहां पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि लिट्टी गेंहू से बनती है और प्रत्येक किसान अपनी फसल के लिए आंदोलनरत है। यही वजह है कि प्रदर्शन के लिए उन्होंने यह अनूठा तरीका अपनाया है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं कर लेती तब तक वह यही रहेंगे।