दिल्ली में सड़कों पर अगर बेहतर निकासी का रास्ता मिल जाए तो साइकिल की सवारी समय के साथ पैसा तो बचाएगी ही, सेहत भी इससे चंगी रहेगी। बोनस में दिल्लीवालों को तरोताजा हवा भी मिलेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि शौकिया साइकिल सवार न होने पर भी साइकिल छोटी दूरी के लिए आवाजाही का बेहतर माध्यम साबित हो सकती है। हालांकि, सड़कों की ढांचागत खामियों व अव्यस्थित यातायात लोगों को वाहन से साइकिल चलाना सुरक्षित नहीं है। अमर उजाला संवाददाता संतोष कुमार की विशेष रिपोर्ट....
रविवार को केवल साइकिल
प्रीत विहार के दक्ष जाधव शौकिया साइकिल चलाते हैं। सुबह करीब 6 बजे वह रोज इंडिया गेट तक साइकिल से आते हैं। करीब नौ किमी की दूरी तय करने में उनको बीस मिनट के करीब लगते हैं। शनिवार व रविवार को वह कभी कुतुबमीनार, गार्डेन ऑफ फाइव सेंसेज तो कभी सिग्नेचर ब्रिज और रिंग रोड के चक्कर लगाते रहते हैं। उनका मानना है कि सुबह सड़क खाली रहने से साइकिल चलाने में बहुत सहूलियत रहती है। लेकिन दिन चढ़ने के साथ जैसे-जैसे ट्रैफिक बढ़ता है, सड़कों पर निकलना आसान नहीं है। जबकि सेहत के साथ यह आरामदायक सवारी है।
साइकिल चलाकर बनाएं सेहत:
साइकिल चलाने से मोटापा काफी हद तक नियंत्रण में आ सकता है। हफ्ते भर साइकल चलाने से एक हजार कैलोरी तक बर्न हो जाती है। रोजाना 20 मिनट की साइकिल के प्रयोग से लोग स्वस्थ रह सकते है। चाहे किसी की उम्र 18 हो या 64 यह सभी के लिए फायदेमंद है।
डॉक्टर विजय कुमार, न्यूट्रिशनिस्ट, राजीव गांधी अस्पताल
यह एक ऐसी एक्सरसाइज है, जिसमें आपको ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी शरीर के सभी अंगों की कसरत भी हो जायेगी। अगर किसी को आफिस या अन्य कार्यों से रोजाना 10 से 12 किलोमीटर का सफर करना है तो गाड़ी या मोटर साइकल के स्थान पर साईकल का प्रयोग करना उसके लिए काफी फायदेमंद है।
डॉक्टर अजय कुमार, वरिष्ठ चिकित्सक, पूर्वी दिल्ली नगर निगम
सिर्फ 100 किमी लंबा साइकिल ट्रैक:
इसमें से ज्यादातर सड़कों पर अलग से साइकिल लेन नहीं है। विकास मार्ग, एनएच-24 सरीखी जिन चंद सड़कों पर इसे बनाया गया है, वहां भी पीक आवर्स में बाइक सवार कब्जा कर लेते हैं। बाकी समय में बीच-बीच में अतिक्रमण का जाल फैला रहता है। दिल्ली में करीब 11 लाख साइकिल सवार हैं, जबकि यहां सिर्फ 100 किलोमीटर साइकिल ट्रैक हैं।
दिल्ली सरकार की योजना:
दिल्ली सरकार पीडब्ल्यूडी के अधीन सड़कों की रि-डिजाइन करने के प्रोजेक्ट पर काम रही है। इसके तहत न सिर्फ सड़कों का ढांचा सुधारा जाना है, बल्कि फुटपाथ, साइकिल ट्रैक आदि की सुविधा को भी वैश्विक स्तर पर विकसित करना है। जून 2021 में इसके प्रोजेक्ट के शुरू होने की उम्मीद है। 2023 तक इस प्रोजेक्ट का पूरा कर लिया जाएगा। दिल्ली सरकार का दावा है कि इसके बाद राजधानी की सड़कें वैश्विक मानकों को पूरा करेंगी।
साइकिल का बिजनेस अच्छा
कोरोना काल में कारोबार में थोड़ी मंदी आई थी, लेकिन अब फिर से रफ्तार पकड़ ली है। महीने में करीब 300-350 साइकिलें आसानी से बिक जाती हैं। बिना गियर वाली साइकिलें 5-7 हजार रुपये में, जबकि गीयर वाली साइकिलें 10-20 हजर रुपये में है।
मालिक अनुराग, साइकिल कारोबारी
चुनौती भी नहीं है कम
- साइकिल ट्रैक सिर्फ 100 किमी लंबा है। इससे साइकिल सवारों को मुख्य सड़क पर चलना पड़ता है।
- सड़कों की बनावट और पहले से बने साइकिल ट्रैक को री-डिजाइन की जरूरत।
- सड़क किनारे नालों पर बने अधिकतर साइकिल ट्रैक छतिग्रस्त, बनते हैं दुर्घटना का कारण।
- साइकिल चालकों को दूसरे वाहन इंडीकेटर नहीं देते है।
- पीक आवर्स के हैवी ट्रैफिक व सड़कों के जाम के बीच निकलना आसान नहीं रहता।
- वाहन चालक लेन ड्राइविंग नहीं करते।
- वाहनों की तेज रफ्तार वाहन होती है।
दुर्घटना संभावित क्षेत्र
पूरी दिल्ली में गोकुलपुरी चौक, आइएसबीटी कश्मीरी गेट, कश्मीरी गेट बोलेवार्ड चौक, लिबासपुर बस स्टेशन, मुकुंदपुर चौक, पीरागढ़ी चौक, पंजाबी बाग चौक, शास्त्री नगर मेट्रो स्टेशन, शास्त्री पार्क, वजीराबाद और पुस्ता उस्मानपुर चौक ऐसी जगहें हैं, जहां पर संभल कर चलने की आवश्यकता है। दिल्ली में सड़क दुर्घटनाओं में 2020 में करीब 1163 मौतें हुई थी, जबकि 2019 में यह आंकड़ा 1433 था। इसमें साइकिल सवार भी शामिल थे।