नवोदय विद्यालय स्कूलों को सैनिक स्कूल में तब्दील किये जाने के मामले में सरकार के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। एबीवीपी के बाद अब लेफ्ट संगठनों ने सरकार को घेरा है। छात्र संगठनों का कहना है कि एक ओर सरकार दूरछराज व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा मुहैया करवाने की बात करती है तो दूसरी तरफ नवोदय विद्यालय स्कूलों पर संकट मंडरा रहा है। सैनिक स्कूल खोलने के नाम पर नवोदय स्कूलों का अस्तित्व खतरे में है।
जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एन साईबालाजी और लेफ्ट संगठनों के पदाधिकारियों ने मंगलवार को इस मामले पर विरोध दर्ज करवाया। उनका कहना है कि केंद्रीय बजट 2021 में 100 नए सैनिक स्कूल(पीपीपी मोड) से खोलने की घोषणा की गई है। इसी के तहत मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में नवोदय स्कूलों को सैनिक स्कूल में तब्दील करने की योजना तैयार कर ली गई है।
इन स्कूलों को चिह्नित भी कर लिया गया है। ऐसे में इन स्कूलों में पहले से पढ़ रहे छात्रों का क्या होगा? इनके सैनिक स्कूल में तब्दील होने से नवोदय स्कूलों में सीटों की कटौती होगी। अभी तक नवोदय स्कूल में बेटियों के लिए 33 फीसदी सीट आरकक्षित हैं। जबकि सैनिक स्कूल में 10 फीसदी है।इसके कारण बेटियों को आगे बढ़ाने की योजना भी अटक जाएगी।
नवोदय विद्यालय को सैनिक स्कूल में तब्दील करने की बजाय नए सैनिक स्कूलों को तैयार किया। लेफ्ट छात्र संगठनों ने सरकार को चेताया है कि प्रस्ताव वापस लेने तक विरोध जारी रहेगा। उधर, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का इस मु्द्दे पर कहना है कि नवोदय विद्यालय को सैनिक स्कूल में तब्दील करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर एबीवीपी के कार्यकर्ताओं और छात्रों ने अपनी ही सरकार के विरोध में प्रदर्शन किया। जंतर-मंतर से प्रदर्शन संसद तक जाना था। लेकिन दिल्ल पुलिस ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के पास ही प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी वहीं पर बैठकर विरोध दर्ज करते रहे। एबीवीपी दिल्ली के प्रदेश मंत्री सिद्धार्थ यादव ने कहा कि ॐहम चाहते हैं कि नवोदय तथा सैनिक विद्यालय हर जिले में स्थापित हों। वहीं नवोदय विद्यालयों को और मजबूत करने की जरूरत है। नवोदय विद्यालयों को सैनिक स्कूल में तब्दील करने से उनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
देश को ओर अधिक नवोदय विद्यालय और सैनिक स्कूल की जरूरत है। क्यूँकि दोनो मॉडल की अपनी विशेषता है। छात्रों को यह कन्वर्जन मॉडल स्वीकार नहीं है। सरकार को अपने वादों के अनुरूप नए सैनिक स्कूल की स्थापना करनी चाहिए।। इसका मतलब यह नहीं कि मौजूदा स्कूलों को बदल दिया जाएगा।