टीकरी बॉर्डर पर बेसहारा और गरीब तबके के बच्चों के लिए किसान स्कूल खोला गया है। लगभग एक सप्ताह से कार्यकर्ताओं ने आंदोलन स्थल पर इधर-उधर घूमते बच्चों को पढ़ाना शुरू किया था। अब किसान सोशल आर्मी ने यहां एक टेंट के अंदर अस्थायी किसान स्कूल स्थापित कर दिया है, जहां लगभग दर्जनभर बच्चे इस वक्त पढ़ रहे हैं।
टीकरी बॉर्डर पर किसान अपने आंदोलन के अंदर नयापन बनाए रखने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं। बिना कृषि कानूनों को वापस कराए वह यहां से वापस लौटने को राजी नहीं हैं। उन्हें इस बात का भी अंदेशा है कि सरकार भी इतनी आसानी से उनकी बात मानने वाली नहीं है।
ऐसे में लंबे समय तक दिल्ली की सीमाओं पर बने रहने के लिए किसानों ने नई-नई तरकीब निकालनी शुरू की है। किसानों ने तय किया है कि वह बच्चों को पढ़ाएंगे और आने वाले दिनों में यहां उन बुजुर्ग किसानों को पढ़ने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा, जो पढ़े लिखे नहीं हैं।
किसान सोशल आर्मी के अनूप सिंह चानौत ने कहा कि यहां किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शनिवार को हरियाणा और पंजाब से सैकड़ों महिलाएं, बच्चे और युवा भी पहुंचे। उन्होंने कहा लोगों के सहयोग से किसानों और आसपास के गरीब तबके के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देना शुरू किया है। उन्हें किताब-कॉपी और पेंसिल आदि भी मुहैया कराई गई। यहां पढ़ने के लिये आने वाले बच्चे काफी खुश हैं।