कार्यक्रम की जानकारी देते आयोजक...
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यमुना को निर्मल और अविरल बनाने की मुहिम के तहत यमुना प्रेमी यमुनोत्री से मथुरा तक कलश यात्रा निकालेंगे। 20 मार्च से 18 अप्रैल के बीच करीब 620 किमी लंबी चलने वाली इस यात्रा के दौरान आम लोगों को यमुना नदी और उसके निर्मल जल की अहमियत बताई जाएगी। यात्रा के समापन पर 18 अप्रैल को यमुनोत्री से कलश में भरकर लाए पानी को मथुरा में विश्राम घाट में डाला जाएगा। इसके बाद यमुना और कृष्ण का विवाह कराया जाएगा।
इंग्लैंड से अध्ययन कर लौटे युवा उद्योगपति रंजीत चतुर्वेदी ने शनिवार को नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में मीडिया से बातचीत में कहा कि जलीय जीवों व पक्षियों की कई प्रजातियां खत्म हो गई हैं और अनेक लुप्त होने की कगार पर हैं। अभी नहीं चेता गया तो लाखों लोगों को जीवन देने वाली नदी एक नाला बनकर रह जाएगी।
उन्होंने कहा कि इसकी निर्मलता धरना-प्रदर्शन, चिट्ठी और सोशल मीडिया पर आवाज उठाकर नहीं लौटाई जा सकती है। यमुना को स्वच्छ करना है तो आम लोगों को जागरूक करना पड़ेगा। नदी के किनारे रहने वाले लोगों के प्रयासों से ऐसा हो सकता है।
चतुर्वेदी ने बताया कि पदयात्रा के दौरान विकासनगर, पोंटा साहिब, हथिनीकुंड, कैराना, बागपत, गाजियाबाद, दिल्ली, नोएडा के लोगों को बताया जाएगा कि नदी की उनके लिए क्या अहमियत है। पदयात्रा के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत 450 राजनैतिक और गैर राजनैतिक लोगों को आमंत्रित किया गया हैं।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की जाएगी कि यमुना छठ (चैत्र नवरात्र की छठ) को बृज के अन्य त्योहारों की तरह मनाया जाए। अभियान से जुड़ी नीरा मिश्रा ने बताया कि गंगा नदी की अविरलता के लिए जैसे सरकार मिशन के रूप में काम काम रही है, उसी तरह यमुना नदी के लिए भी कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की गई कि मथुरा में यमुना नदी के तट पर भगवान श्रीकृष्ण की बड़ी प्रतिमा स्थापित की जाए।