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पांच लाख भारतीयों से धोखाधड़ी का मामला : नौ से ज्यादा चीनी ठगों की पहचान

Thu, 10 Jun 2021 05:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली

सार

  • अंग्रेजी नाम रखकर भारतीयों से बात करते थे
  • चीन में ठगी के लिए चल रहे छह भारतीय मोबाइल फोन
  • आरोपी शुरुआत में 10 फीसदी मुनाफा देते थे
  • क्रिप्टो करेंसी से बाहर पैसा जा रहा था
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गिरफ्त में आरोपी... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने एप के जरिए पांच लाख से ज्यादा भारतीयों के साथ ठगी करने वाले नौ से ज्यादा चीनी नागरिकों की पहचान कर ली है। ये चीनी नागरिक अपने अंग्रेजी नाम रखकर भारत में भारतीयों से ठगी करने वाले उनके एजेंटों से बात करते थे और इन्हीं नामों से भारत में मौजूद फर्जी कपंनियों के बैंक खातों को ऑपरेट कर रहे थे। आरोपी भारत में वाट्सएप कॉल करते थे। गिरफ्तार 11 आरोपियों के अलावा आईजीआई एयरपोर्र्ट से एक तिब्बती युवती पेमा वांगमो को गिरफ्तार किया गया है। 

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फिलहाल तिब्बती युवती को बैंगलुरू पुलिस ले गई है।  साइबर सेल इस युवती को ट्रांजिट रिमांड पर लाकर जल्द ही गिरफ्तार करेगी। हालांकि चीनी नागरिकों के पासपोर्ट आदि जब्त नहीं हुए है। जबकि इस वर्ष की शुरूआत में जब ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था उस समय चीनी नागरिकों के पासपोर्ट जब्त् हुए थे।  

साइबर सेल डीसीपी अन्येष रॉय ने बताया कि चीन में बैठकर पूरे भारत में ठगी का गिरोह चलाने वाले चीनी नागरिक छह भारतीय फोन चीन में चला रहे हैं। उनको भारतीय फोन उनके भारतीय एजेंटों ने दिए थे। बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ चीनी नागरिक भारत आ चुके हैं और यहां पर कुछ समय तक रहे हैं। चीनी नागरिकों ने टॉनी व फियोना जैसे अंग्रेजी नाम रखे हुए हैं। 
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इन चीनी नागरिकों ने ठगी के लिए कई एप को अप्रैल महीने की शुरूआत में भारतीय बाजार में सर्कुलेट करना शुरू किया था। इसके बाद 12 मई को ये एप बंद हो गई। कुछ एप गूगल प्ले स्टोर तक पहुंच गई। पीड़ितों ने इन एप को गूगल प्ले स्टोर से डाउन लोड किया था। जबकि पीड़ितों को कुछ एप लिंक व ब्लक मैसेज के जरिए भेजी गई थीं।  

साइबर सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पीड़ितों का पैसा पेमेंट गेटवे व यूपीआई के जरिए सेल कंपनियों के बैंक खातों में जाता था। इन बैंक खातों से हवाला व क्रिप्टो करेंसी के माध्यम ये चीन समेत अन्य देशों में जाता था। साइबर सेल इस बात की जांच कर रही है कि कंपनियों के बैंक खाते से पैसा किस-किस देश में जाता था।

आकाओं से कभी नहीं मिले
साइबर सेल अधिकारियों ने बताया कि चीनी नागरिकों के इस गिरोह में कई ऐसे भारतीय काम कर रहे हैं जो कभी चीनी आकाओं से नहीं मिले और न ही उन्हें जानते। बस उनके लिए काम कर रहे थे। इन लोगों ने ही ठगी के लिए भारतीयों को गिरोह में भर्ती किया था। आरोपी रोबिन ने पूछताछ के दौरान बताया वो लोग इन एप्प के जरिये टेक्नोलॉजी के नाम पर रुपए कमाने का लालच लोगों को दे रहे थे। जो कोई इस एप्प को जॉइन करता तो उसे ऑड मेंबर्स बनाने का लालच दिया जाता था। जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ सके।

शुरू में ये 10 फीसदी मुनाफा देते थे
पुलिस अधिकारियों के अनुसार ये कम से कम 300 रुपये इंवेस्ट कराते थे और दोगुना करने का झांसा देते थे। ज्यादा से ज्यादा रकम की कोई सीमा नहीं थी। शुरू में ये पीड़ित को 10 फीसदी मुनाफा देते थे। कुछ को ये प्रत्येक दिन का मुनाफा देते थे तो कुछ को ये 24 दिन में दोगुना रकम करने का झांसा देते थे। कुछ दिन तो ये पैसा देते थे उसके बाद ये गायब हो जाते थे।  आरोपी ऐसे पैस डालते थे कि केवल मोबाइल एप्लीकेशन में ही नजर आते थे एकाउंट में नहीं।

टेलीग्राम के जरिए संपर्क करता था
रॉबिन चीनी नागरिकों से टेलीग्राफ के जरिए संपर्क में रहता था। उमाकांत, वेदचंद्रा, हरीओम और अभिषेक दिल्ली के रहने वाले हैं। ये सभी शेल कंपनीज के यहीं डायरेक्टर थे। इन्होंने अपने परिजनों को भी कंपनियों में पदाधिकारी बना रखा था।  वहीं आरोपी शशि बंसल और मिथलेश शर्मा ने बोगस कंपनियां और बैंक अकाउंट चीनी जालसाजों को मुहैया करवाए थे। आरोपी सीए अवकि ने पुलिस को बताया वे शेल कंपनीज अपने फैमिली मेंबर, दोस्त और एम्पलॉइज के नाम पर खोलते, जिन्हें वे चाइनीज नागरिकों को दो से तीन लाख में एक कंपनी को बेच देते। उसने चीनी नागरिकों के लिए 110 शेल कंपनियां बनाई थीं। कपंनियों में कुछ डमी डायरेक्टर भी बना रखे थे। 

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