दिल्ली के अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए बिस्तर नहीं है। हालात ऐसे हैं कि वेंटिलेटर और आईसीयू मांगने पर अस्पताल प्रबंधन हाथ जोड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर स्थिति ऐसी है कि बुराड़ी स्थित निरंकारी मैदान पर एक हजार बिस्तर की सुविधा है लेकिन वहां स्टाफ नहीं है। शकूरबस्ती रेलवे स्टेशन पर आइसोलेशन कोच है लेकिन पहले मरीज को रेफरल कार्ड लेकर आना होगा।
छतरपुर स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल कोविड सेंटर में 500 बेड की व्यवस्था है लेकिन रविवार तक यह शुरू नहीं हुआ और सोमवार से यहां पहले नोडल अधिकारी की मंजूरी लेकर आनी होगी। सरकार की यह व्यवस्था तब है जब दिल्ली में हर चार मिनट में एक संक्रमित मरीज की मौत बीते शनिवार को हुई है।
दिल्ली के अस्पतालों में बीते बृहस्पतिवार से ही बिस्तरों का संकट है। यहां ऑक्सीजन की कमी भी बनी हुई है जिसकी वजह से आईसीयू और वेंटिलेटर के लिए दिल्ली के मरीजों को हापुड, भल,सोनीपत, पानीपत सहित आसपास 200 किलोमीटर तक जाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं गुडग़ांव, नोएडा और फरीदाबाद ने अपने अपने मरीजों को ही अस्पतालों में आधार कार्ड देखकर भर्ती करने आदेश दिया है। ऐसे में दिल्ली के कोरोना मरीज बिस्तर, ऑक्सीजन, एंबुलेंस की कमी के साथ ही सरकार के नियमों की वजह से परेशान हो रहे हैं।
रविवार देर शाम जानकारी मिली कि सरदार वल्लभ भाई पटेल कोविड सेंटर, छतरपुर सोमवार सुबह 10 बजे से शुरू होगा लेकिन यहां मरीजों को भर्ती करने के लिए सरकार ने रेफरल की शर्त लगा दी है। राजन बाबू टीबी अस्पताल में भी यह शर्त रखी है।
बहरहाल दिल्ली सरकार के नोडल अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग ने कुछ भी जानकारी नहीं दी है लेकिन संत निरंकारी मिशन के प्रवक्ता अमनदीप का कहना है कि उन्होंने एक हजार बिस्तर का कोविड सेंटर तैयार करके शनिवार को ही दिल्ली सरकार के हवाले कर दिया है। अब वहां स्टाफ सरकार देगी जिसके बाद सेंटर शुरू होगा।
40 फीसदी मौतें 48 घंटे में
भारत सरकार के नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) के ही अनुसार 40 फीसदी मौतें अस्पताल में भर्ती होने के 48 घंटे के भीतर हो रही हैं। इसका मतलब यह है कि मरीज गंभीर हालत में अस्पताल पहुंच रहे हैं जिसकी वजह से डॉक्टर भी कुछ नहीं कर पाते। इसकी एक वजह मरीजों को बीमारी के बारे में देरी से पता चलना तो दूसरी यह कि एक से दूसरे अस्पताल के चक्कर लगाते लगाते स्थिति बिगडना।
सरकारी नियमों से हो सकती है काफी देर
डॉक्टरों के ही अनुसार संक्रमित मरीजों का अगर ऑक्सीजन स्तर 90 फीसदी या उससे कम है तो उन्हें तत्काल भर्ती होने की आवश्यकता है। इसके अलावा एचआर सीटी स्कैन में अगर 20 से कम वैल्यू आती है तो भी चिंता का विषय है। एम्स की डॉ. रिचा अस्थाना का कहना है कि 90 फीसदी से अधिक ऑक्सीजन होने पर मरीजों को अस्पताल जाने की जरूरत नहीं है लेकिन जिनका कम है उन्हें तत्काल जाना चाहिए।
कब मरीजों को मिलेंगे यहां बिस्तर
. राजन बाबू टीबी अस्पताल 60 बेड
. निरंकारी मैदान बुराड़ी 1000 बेड
. डीआरडीओ सेंटर 250 अतिरिक्त बेड
. एम्स, सफदरजंग, लेडी हार्डिंग सीएसआईआर सेंटर
मरीज के लिए डीएसओ की मंजूरी क्यों...
मयूर विहार निवासी 70 वर्षीय मो. लाइक क्रोनिक किडनी मरीज हैं और इन्हें तत्काल आईसीयू चाहिए लेकिन इन्हें कहीं भी बिस्तर नहीं मिल रहा। शनिवार से यह दिल्ली के हर सेंटर, अस्पताल में चक्कर लगा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी मिलने से यह छतरपुर पहुंचे जहां पता चला कि सेंटर अभी शुरू नहीं हुआ है। सोमवार से यहां मरीज भर्ती होंगे लेकिन उसके लिए डीएसओ (जिला निगरानी अधिकारी) का रेफरल लाना होगा। वहीं पांडव नगर निवासी अंकुर शुक्ला ने कहा कि उनकी मौसी और एक अन्य सदस्य की तबियत बेहद खराब है। अपने मरीज को भर्ती करने के लिए वे क्यों किसी डीएसओ से मंजूरी लेंगे। क्या उन्हें उपचार लेने का अधिकार नहीं है? उन्होंने कहा कि सरकार को तत्काल नियम बदलना चाहिए और मरीजों को बेड उपलब्ध कराना चाहिए।