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जज्बा और जुनून : बेटियों का इंजीनियरिंग में भविष्य बना रही हैं डॉ. रुचिका

Mon, 08 Mar 2021 05:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा सीमा शर्मा, नई दिल्ली
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रुचिका मल्होत्रा - फोटो : अमर उजाला
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देश में महिला इंजीनियरों की संख्या बेहद कम है। सरकार ने इसी कमी को दूर करने को आईआईटी और एनआईटी जैसे दिग्गज संस्थानों में बेटियों की संख्या बढ़ाने के  लिए 20 फीसदी अतिरिक्त सीटों का प्रावधान भी किया है ।

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ऐसे समय में डॉ. रुचिका मल्होत्रा आम बेटियों के लिए इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भविष्य बनाने की मिसाल हैं। दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की प्रोफसर रुचिका मल्होत्रा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ दो फीसदी वैज्ञानिकों में शुमार हैं। इसके अलावा उन्हें सबसे कम उम्र में पीएचडी गाइड बनने के साथ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) लैब तैयार करने का श्रेय भी जाता है। 

डॉ. रुचिका मल्होत्रा अपनी दादी शकुंतला रानी से बेहद प्रभवित थी। इसी के चलते बचपन से ही शिक्षक बनने का सपना देखा और पूरा किया। दादी की सीख के साथ कुछ अलग करने के जज्बे के चलते इंजीनियरिंग में भविष्य बनाने की सोची। आज रुचिका डीटीयू के डिपार्टमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। रिसर्च क्षेत्र में बेहतरीन काम करने के चलते विश्वविद्यालय के रिसर्च विभाग में एसोशिएट डीन रिसर्च के पद की भी जिम्मेदारी मिली है। 
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एआई और इमेज प्रोसेसिंग के चलते दो फीसदी वैज्ञानिकों में हुईं शामिल: 
अमेरिका की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी 2020 की रिपोर्ट में प्रो. मल्होत्रा दुनियाभर के बेहतरीन दो फीसदी वैज्ञानिकों में शामिल की गई हैं। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और इमेज प्रोसेसिंग के क्षेत्र में बेहतरीन रिसर्च के चलते भारतीय महिला वैज्ञानिक को यह सम्मान मिला है। इस रिपोर्ट में चुनिंदा महिला इंजीनियर वैज्ञानिकों को जगह मिली है। इसके अलावा डीटीयू से 2018, 2019 और 2020 में लगातार तीन साल तक रिसर्च अवार्ड मिले हैं। साथ ही कई अंतरराष्ट्रीय अवार्ड भी मिले हैं। 

10 साल की नौकरी में दो सौ से अधिक रिसर्च पेपर प्रकाशित:
प्रो. रुचिका ने एमसीए के बाद पीएचडी जारी रखी। पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्च यूएसए से की है। इसके लिए यूजीसी की प्रतिष्ठित रमन फेलोशिप मिली थी। नौकरी के महज ढाई साल में पीएचडी गाइड बनने का मौका मिला। दस साल की नौकरी में सात महिला इंजीनियर को गाइड बनकर पीएचडी करवाई है। आईबीएम ने उन्हें 2013 में फैकल्टी अवार्ड दिया। इंपीरिकल रिसर्च इन सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और ओरिएंटिड सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में दो किताब भी लिखी हैं। सॉफ्टवेयर टेस्टिंग, क्वालिटी, सॉफ्टवेयर मीट्रिक्स आदि पर विशेष रूप से रिसर्च पेपर लिखे हैं। 

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