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दिल्ली दंगा : कोर्ट ने आगजनी के मामले में शिकायतकर्ता की गिरफ्तारी को बताया मूर्खतापूर्ण

Thu, 18 Mar 2021 06:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

  • पीड़ित ने घर जलाने की शिकायत दी थी
  • पुलिस ने धर्म स्थल के जलाने के मामले में बना दिया था आरोपी
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delhi violence - फोटो : जी पॉल
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विस्तार
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अदालत ने आगजनी के मामले में एफआईआर को धर्म स्थल जलाने के दूसरे केस से मिलाने और शिकायतकर्ता को गिरफ्तार करने पर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने पुलिस की इस कार्रवाई को स्पष्ट तौर पर मूर्खतापूर्ण करार दिया है। अदालत ने ये भी कहा कि दंगों के दौरान शिव विहार इलाके में मदीना मस्जिद को जलाने के मामले में जांच से संबंधित कुछ भी सामग्री रिकार्ड पर नहीं है। 

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कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने उत्तर पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त को इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी। 

अदालत ने यह टिप्पणी मजिस्ट्रेट कोर्ट के एक फरवरी के आदेश के खिलाफ पुलिस की अपील पर की है। निचली अदालत ने हाजी हाशिम अली की शिकायत पर मस्जिद को अपवित्र करने के मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। शिकायतकर्ता ने अपना घर जलाने की भी शिकायत की थी। पुलिस ने इस शिकायत को नरेश चंद नामक शख्स की शिकायत के साथ मिला दिया था। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर हाशिम अली को गिरफ्तार कर लिया था। फिलहाल वह जमानत पर है। 
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अदालत ने कहा कि हाशिम अली की शिकायत को और नरेश चंद की शिकायत को करावल नगर थाने की एफआईआर के साथ मिलाना और उसमें हाशिम अली को गिरफ्तार करना हैरान करने वाला है। वह अपने मामले में शिकायतकर्ता और अब खुद आरोपी बन गया है। ये कार्रवाई स्पष्ट तौर पर मूर्खतापूर्ण है। 
अदालत ने अगली तारीख पर एसएचओ करावल नगर को सुनवाई में मौजूद रहने का निर्देश दिया है। अदालत ने एसएचओ को मस्जिद में आगजनी के मामले में जांच की फाइल और केस डायरी साथ रखने के लिए भी कहा है। 

अदालत ने इस बात पर गौर किया कि पुलिस ने मस्जिद में आगजनी मामले में 26 फरवरी 2020 को दर्ज एफआईआर की जानकारी मजिस्ट्रेट कोर्ट को नहीं दी थी। अदालत ने कहा मजिस्ट्रेट का एक फरवरी का आदेश शिव विहार इलाके में 25 फरवरी 2020 को मदीना मस्जिद को जलाने व अपवित्र करने के संबंध में है। पुलिस के अनुसार इस मामले में 26 फरवरी 2020 को ही एफआईआर दर्ज हो चुकी थी लेकिन पुलिस की ओर से कोर्ट को इसकी जानकारी नहीं दी गई। 

मामले की सुनवाई के दौरान हाशिम अली की ओर से अधिवक्ता एमआर शमशाद ने कहा था कि मदीना मस्जिद में आगजनी के मामले में पुलिस ने फरवरी 2020 में एफआईआर दर्ज कर ली थी लेकिन इसकी जानकारी दिए बिना ही पुलिस पिछले छह माह पुलिस कई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की। पुलिस ने एफआईआर दर्ज होने के एक साल बाद इसकी जानकारी अदालत को दी थी।  

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