मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वे मामले पर लागू कानून, नियमों, विनियमों और सरकारी नीति के अनुसार याचिका पर बतौर ज्ञापन विचार कर निर्णय ले
उच्च न्यायालय ने कुछ दवा कंपनियों द्वारा उत्पादों को ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट (ओआरएस) के रूप में जानबूझकर गलत लेबल लगाने का आरोप लगाने संबंधी याचिका पर संबंधित अधिकारियों को विचार करने का निर्देश दिया है।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वे मामले पर लागू कानून, नियमों, विनियमों और सरकारी नीति के अनुसार याचिका पर बतौर ज्ञापन विचार कर निर्णय ले। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई भी निर्णय लेने से पहले दूसरे पक्ष को भी सुना जाए क्योंकि उन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
याचिकाकर्ता जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर रूपा सिंह और 8 साल के बच्चे की मां ने दावा किया कि एक स्थानीय फार्मेसी ने उन्हें ओआरएस के नाम पर एक 'आरएस लिक्विड' बेचा और इससे बच्चे की तबीयत खराब हो गई।
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याचिका के अनुसार जब बच्चे की तबीयत खराब हुई, तो उसने एक बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह ली और जब उसे बताया गया कि %ओआरएसएल% %ओआरएस% एक नहीं है। इतना ही नहीं और डब्ल्यूएचओ से मान्य नहीं है।
याची ने कहा फार्मा कंपनियां बिक्री को बढ़ावा देने के लिए जानबूझकर अपने अन्य उत्पादों को ओआरएस के रूप में गलतलेबल कर रही है। ओआरएसएल% नाम से बेचे जाने वाले उपरोक्त पेय पदार्थों में से कोई भी डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित नए %ओआरएस% फॉर्मूलेशन की संरचना का उपयोग नहीं करता। उन्होंने जनहित में ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।