लॉकडाउन का लगभग एक साल पूरा हो गया है। कारोबारियों की आर्थिक रूप से टूटी कमर अभी ठीक भी नहीं हुई थी कि दोबारा कोरोना संक्रमण ने होटल, रेस्टोरेंट, बार, सिनेप्लेक्स को वापस वहीं पहुंचा दिया है। कारोबारियों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि उन्होंन बड़ी पूंजी इन व्यावसाय में लगा दी है तो वे इन्हें बदल भी नहीं सकते हैं।
क्या कहते हैं कारोबारी
कोरोना की वजह से ठप पड़े कारोबार लॉस्रडाउन खत्म होने के बाद 70-100 प्रतिशत तक पटरी पर तो जरूर लौटे, लेकिन हॉस्पिटलिटी इंडस्ट्री 5-10 प्रतिशत ही पटरी पर लौट सकी। दोबारा कोरोना के संक्रमण ने तो आगे की उम्मीद पर भी पानी फेर दिया है। कभी दिल्ली में कोरोना का संक्रमण तेज हो जाता है तो कभी महाराष्ट्र, पंजाब व अन्य राज्यों में। ऐसे में पर्यटक आने से घबराते हैं। हालांकि, हील स्टेशन के रिजार्ट जरूर बेहतर स्थिति में है।
- मोहित शाह, महासचिव, दिल्ली होटल एंड रेस्टोरेंट ऑनर एसोसिएशन
बड़े होटल की तो बात ही छोड़ें तो गेस्ट हाऊस के कमरे भी खाली हैं। दिल्ली में करीब तीन हजार गेस्ट हाउस हैं, उनमें 20 प्रतिशत तक भी कमरे बुक नहीं हुए। फरवरी-मार्च का महीना एक तरह से सीजन होता है। इस दौरान कई आयोजन होते हैं, लेकिन इस साल भी कोरोना संक्रमण की वजह से परेशानी बनी हुई है। सरकार ना तो बिजली-पानी का बिल माफ करती है और ना ही बैंक लोन देती है। ऐसी स्थिति में इस व्यवसाय की कमर सीधी होती नहीं दिखती।