कोरोना महामारी ने पोस्ट कोविड समस्याओं के अलावा लोगों को मधुमेह जैसी घातक बीमारी भी दे दी है। स्थिति यह है कि दिल्ली के अस्पतालों में शुगर के मरीजों की संख्या में 30 फीसदी तक वृद्धि हो गई है। आमतौर पर जिनका शुगर का स्तर सामान्य रहता था अब वह भी मधुमेह से पीड़ित हो रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में मधुमेह एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरी है। लोगों को इसके विषय में सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि, जब तक यह परेशानी रहेगी अन्य बीमारियों का इलाज भी सही से नहीं हो सकेगा।
लोकनायक अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉक्टर सुरेश कुमार ने बताया कि कोरोना के बाद से शुगर के मरीजों में 30 फीसदी तक की वृद्धि हुई है। अस्पताल में कोविड या पोस्ट कोविड इलाज के लिए जो मरीज भर्ती हुए हैं उनमें हर 10 में से दो मरीजों का शुगर स्तर नियंत्रण में नहीं है। कई मरीज ऐसे भी आ रहे हैं जिनका शुगर स्तर हमेशा ज्यादा रहता है। अब उनको डायबिटीज की दवाइयां दी जा रही हैं। महामारी के कारण यह स्थिति हुई है।
डॉक्टर सुरेश का कहना है कि कोरोना संक्रमण के दौरान जिन मरीजों का शुगर लेवल बढ़ा है, वह कुछ दिन बाद सामान्य हो गया, लेकिन टाइप-2 डायबिटीज लोगों में बाद में भी शुगर लेवल बढ़ा हुआ देखने को मिला। संक्रमण के दौरान हुई डायबिटीज कितने दिन तक रहेगी, इसको जानने के लिए अध्ययन की जरूरत है। जीटीबी अस्पताल के डॉक्टर विकास कुमार का कहना है अस्पताल में आने वाले मरीजों की कई प्रकार की जांच की जाती हैं, जिसमें कई मरीजों में शुगर का स्तर बढ़ा हुआ मिलता है। कोरोना से पहले ऐसी स्थिति नहीं थी, लेकिन अब यह देखा जा रहा है कि जो लोग संक्रमित हुए थे उनका शुगर स्तर नियंत्रण में नहीं रहता है।
इसलिए हो रही समस्या
एम्स के वरिष्ठ डॉक्टर अमरींद्र सिंह मल्ही ने बताया कि कोरोना से ठीक होने के तीन महीने बाद तक भी लोगों का शुगर स्तर काबू में नहीं आया है। ऐसा इसलिए है कि संक्रमण अग्न्याशय (पैंक्रिया) को प्रभावित करता है। जब कोरोना होता है तो बाकी अंगों की तरह पैंक्रियास में भी सूजन हो जाती है। वायरस बीटा कोशिकाओं पर हमला करके उसे तोड़ता हैं, जिससे शरीर में इंसुलिन का निकलना कम हो जाता है और शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। अगर लंबे समय तक शुगर स्तर नियंत्रण में नहीं रहता तो इसका असर शरीर की इम्युनिटी पर होता है और वह कमजोर हो जाती है।
एम्स ने जारी किया प्रोटोकॉल
कोरोना के बाद शुगर के बढ़ते मामलों को देखते हुए एम्स के इंडोक्रिनोलॉजी विभाग ने नया प्रोटोकॉल जारी किया है। इसके दिशा-निर्देश के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती मरीज की पहले दिन ही शुगर जांच होगी। अगर शुगर स्तर सामान्य है और तीन दिन बाद स्टेरॉयड दिया जाता है तो शुगर की मात्रा कभी भी बढ़ सकती है, इसलिए मरीजों की नियमित तौर पर शुगर की जांच की जाएगी। जिन रोगियों में स्तर बढ़ा हुआ मिलेगा उनका प्राथमिकता पर इलाज किया जाएगा।
ये रखें ध्यान
- प्रत्येक व्यक्ति को डायबिटीज की जांच करानी चाहिए।
- कोरोना से ठीक होने के 180 दिन के भीतर शुगर स्तर को नियंत्रित करना बेहद आवश्यक है।
- शुगर स्तर 70 और 180 तक होना चाहिए। अगर यह बढ़ रहा है तो तुरंत डॉक्टरों से सलाह लेना चाहिए।
- मधुमेह पीड़ित मरीजों को रोजाना व्यायाम करना चाहिए और खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए।