कोरोना काल में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी ऑनलाइन के तौर तरीकों में ढल रही है। यही वजह है कि कोचिंग हब के लिए मशहूर मुखर्जी नगर व ओल्ड राजेंद्र नगर की तस्वीर भी पूरी तरह से बदल चुकी है। युवाओं की चहल पहल और देश दुनिया की घटनाक्रम से गूंजने वाले यहां के गलियारें अब सुनसान हैं।अनलॉक होती दिल्ली में यहां के कोचिंग हब के साथ दुकानदारों को पुरानी तस्वीर के लौटने के इंतजार है।
दिल्ली के इन दो इलाकों में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में देशभर से युवा नई उम्मीद व जज्बात के साथ यहां पहुंचते हैं। प्रत्येक वर्ष यहां नई सफलताओं और असफलताओं की कई कहानी बनती है। पिछले वर्ष आई कोरोना महामारी की वजह से अब यह कहानियां कोचिंग हबों में नहीं बल्कि युवाओं के घरों में ही बन रही हैं। यही वजह है कि कभी युवाओं से गुलजार रहने वाले इन गलियारों को पुरानी कहानियों का इंतजार है।
ऑनलाइन प्रणाली में बदल चुके हैं कोचिंग संस्थान
कोरोना महामारी के कारण अधिकांश कोचिंग संस्थान खुद को ऑनलाइन प्रणाली में बदल चुके हैं। इस कड़ी में संस्थान अब छात्रों को ऑनलाइन क्लास देने के साथ पठ्न सामाग्री भी उपब्ध कर रहे हैं। ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित एक कोचिंग संस्थान ने बताया कि कोचिंग संस्थानों के लिए लॉकडाउन का दौर खत्म नहीं हुआ है। इस वजह से संस्थानों ने खुद को ऑनलाइन सांचे में ढाल दिया है। इसके तहत पहले की तरह ही कक्षाओं को संचालन किया जाता है, जिसकी लाइव स्ट्रीम पंजीकृत छात्त्रों तक की जाती है। हालांकि, पहले के मुकाबले संस्थानों ने फीस को बढ़ा दिया है। क्योंकि, जो पठ्न सामाग्री छात्रों को बाहर से लेनी होती थी। अब उसे संस्थान ही उपलब्ध करा रहे हैं।
70 फीसदी तक खाली हो चुके हैं पीजी
ऑनलाइन पढ़ाई के दौर में जहां एक ओर छात्रों को फायदा हुआ है। वहीं, दूसरी ओर पीजी मालिकों को इसका नुकसान हुआ है। कोचिंग हब से करीब 70 फीसदी छात्र अपने शहर व गांवों का रूख कर चुके हैं। ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित गुरमीत सिंह चड्ढा ने बताया कि आम दिनों में वह चार कमरों को पीजी पर दिया करते थे। ऑनलाइन कक्षा के चलन के बाद छात्र अपने-अपने घर चले गए। इसके बाद केवल एक ही पीजी किराया पर उठा हुआ है, जिसके सहारे घर का खर्चा चल रहा है।
स्टडी मटिरियल विक्रेताओं की हालत खस्ता
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के सहारे केवल पीजी मालिकों की जीविका ही नहीं चलती है। इनसे स्टडी मटिरियल विक्रेताओं का भी व्यापार जुड़ा हुआ होता है। दुकानदारों का कहना है कि कोरोना महामारी के बीच ऑनलाइन कक्षा होने से उन पर दोहरी मार पड़ रही है। अधिकांश छात्र इलाके को छोड़ चुके हैं और जो गिनती के छात्र रह गए हैं वे कोरोना के डर से किताबों की खरीदारी के लिए ऑनलाइन विकल्प को अपना रहे हैं।
-यदि कोचिंग संस्थान जल्दी नहीं खुले तो पुस्तक विक्रेताओं की हालत खराब हो जाएगी। यहां कई दुकानें किराए पर चल रही हैं। दुकानदार कर्ज तले दब रहे हैं।
-अरुण कुमार, पुस्तक विक्रेता
-पहले के मुकाबले यहां केवल दो फीसदी ही छात्र पुस्तकों की खरीदारी करने आते हैं। कोचिंग खुलने पर छात्रों की अधिक भीड़ रहती थी। सरकार को कोरोना नियमों के साथ कोचिंग संस्थानों को भी खुलने की अनुमति देनी चाहिए।
-सुधीर चौधरी, पुस्तक विक्रेता