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कोरोना का कहर : न थे श्मशान ले जाने के पैसे और न अंतिम संस्कार के, ई-रिक्शा से लेकर गए शव

Sat, 29 May 2021 12:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • परिजनों के पास इतने पैसे ही नहीं थी कि अंतिम संस्कार किया जा सके
  • स्थिति यह थी कि परिजनों के पास उसके शव को एंबुलेंस से श्मशान घाट तक ले जाने के पैसे नहीं थे
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कोरोना से मौत - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कोरोना के चलते जारी लॉकडाउन ने लोगों को आर्थिक रूप से भी तोड़ दिया है। स्थिति यह है कि कितने ही ऐसे मामले सामने आए हैं जहां लोगों के पास अपनों के अंतिम संस्कार तक के पैसे नहीं हैं। ऐसे में या तो महामारी का शिकार और दम तोड़ चुके लोगों का अंतिम संस्कार सरकार की ओर से किया जाता है या फिक कुछ लोग या गैर सरकार संगठन इस काम को अंजाम दे रहे हैं। 

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ऐसा ही एक मामला दिल्ली के जग प्रवेश अस्पताल का सामने आय़ा है। वहां पवन नाम के एक व्यक्ति की मौत हो गई। लेकिन उसके परिजनों के पास इतने पैसे ही नहीं थी कि अंतिम संस्कार किया जा सके। स्थिति यह थी कि परिजनों के पास उसके शव को एंबुलेंस से श्मशान घाट तक ले जाने के पैसे नहीं थे। परिजन अस्पताल के बाहर लोगों से गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने नहीं सुना। तब एक ई-रिक्शा वाला इसके लिए तैयार हुआ। 

लेकिन दिक्कत यह कही कि श्मशान पहुंचने के बाद संस्कार के पैसे भी उस व्यक्ति के परिजनों के पास नहीं थे। ऐसे में एक गैर सरकारी संगठन ने इस काम में मदद की और तब कहीं जाकर अंतिम संस्कार हो सका। 
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पता चला है कि जिस घर में हादसा हुआ वह परिवार पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क इलाके में रहता है। लॉकडाउन के कारण परिवार में किसी के पास काम-धंधा नहीं बचा और इसी बीच पवन की मौत हो गई। 

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