बेहतर नागरिक सेवाओं के लिए दिल्ली नगर निगम ने प्रत्येक वार्ड को 25 लाख रुपये आवंटित किए हैं। एकीकरण के बाद पहली बार एमसीडी ने सभी 272 वार्डों को एक साथ इतनी बड़ी राशि दी है। इससे वार्डों में निगम के विकास कार्यों को पुन: रफ्तार मिलेगी। वार्डों में नागरिक सेवाओं की देखरेख के लिए नोडल अधिकारी के रूप में तैनात किए गए सभी जोनल अतिरिक्त आयुक्त की निगरानी में इस राशि को खर्च किया जाएगा। इससे एमसीडी की सड़कों, नालियों और पार्कों का बेहतर रखरखाव होगा। वहीं, सफाई से जुड़े उपकरणों को खरीदने में मदद मिलेगी।
एमसीडी ने एक निश्चित समय सीमा के भीतर वार्डों में इस राशि को खर्च करने का निर्देश दिया है। स्थानीय अधीक्षण अभियंता जोनल अतिरिक्त आयुक्त के अनुमोदन के बाद विकास कार्यों को रफ्तार दी जा सकेगी। इसके लिए एमसीडी ने मार्च 2023 तक का समय निर्धारित किया है।
इन विकास कार्यों पर होगा खर्च
एमसीडी ने साफ किया है कि वार्डों में जरूरत के अनुसार इस्तेमाल होने वाले मध्यम आकार के ट्रकों, मलबा उठाने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली, गाद निकालने वाले उपकरणों की खरीद पर यह राशि खर्च होगी। गलियों की मरम्मत, मेनहोल कवर, फ्रेम, गलियों में पत्थर लगाने, मोटे रेत और पाइप आदि खरीदने पर इसे खर्च किया जा सकेगा। पैच की मरम्मत के लिए रेडीमेड कंकरीट खरीदने, नालों से गाद निकालने के दौरान क्षतिग्रस्त जगहों की मरम्मत कराने, सार्वजनिक स्थानों पर सौंदर्यीकरण, गलियों में इंटर सेक्शन, टर्निंग, स्लिप रोड की मामूली मरम्मत पर इसे खर्च किया जाएगा। मानसून के दौरान आकस्मिक कार्यों में इस राशि का मामूली इस्तेमाल हो सकेगा। इसके अलावा एमसीडी के भवनों, नलकूपों, पार्कों और अन्य अधिकार वाली संपत्तियों के भीतर बिजली से संबंधित मरम्मत कार्यों पर अधिकतम एक लाख रुपया खर्च किया जा सकेगा।
दूसरे वार्ड में भी खर्च का प्रावधान
एमसीडी द्वारा प्रत्येक वार्ड को दी गई 25 लाख रुपये की राशि में से यदि कुछ पैसा बच जाता है तो इसे दूसरे वार्ड में भी खर्च करने का प्रावधान रखा गया है। इसके लिए संबंधित अधीक्षण अभियंता जोनल अतिरिक्त आयुक्त की अनुमति के बाद दूसरे वार्ड में खर्च सकते हैं। इसे किसी अन्य वार्ड में छोटे मरम्मत कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।