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Delhi : पर्याप्त मात्रा में बायो सीएनजी का उत्पादन करेगी एमसीडी, जून तक तैयार हो जाएंगे जो संयंत्र

Sun, 02 Apr 2023 06:17 AM IST
दुष्यंत शर्मा आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली

सार

जून तक इसके दो बायो सीएनजी संयंत्र बनकर तैयार हो जाएंगे। दिसंबर तक ओखला में भी एक और बायो सीएनजी संयंत्र खोलने की तैयारी चल रही है। 
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demo pic... - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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एमसीडी पर्याप्त मात्रा में बीयो सीएनजी का उत्पादन करेगी। जून तक इसके दो बायो सीएनजी संयंत्र बनकर तैयार हो जाएंगे। दिसंबर तक ओखला में भी एक और बायो सीएनजी संयंत्र खोलने की तैयारी चल रही है। 

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इससे न केवल दिल्ली को जैविक कचरे को निपटाने में बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि बायो सीएनजी के उत्पादन से एमसीडी खुद को आर्थिक रूप से मजबूत करेगी। इससे करीब 202 एकड़ में फैली दिल्ली की तीन लैंडफिल साइट को खत्म करने में भी मदद मिलेगी। 

तीनों बायो सीएनजी संयंत्रों में रोजाना 500 मीट्रिक टन वनस्पति कचरे को संसाधित किया जाएगा। अनुमान है कि इससे 28,000 किलोग्राम कंप्रेस्ड बायो सीएनजी का उत्पादन होगा। इनमें से पहला संयंत्र घोघा और दूसरा नांगली में लगाया जा रहा है। इन दोनों की मिलाकर कुल क्षमता रोजाना 200 मीट्रिक टन वनस्पति कचरा खपत करने की होगी, लेकिन ओखला में बनाया जा रहा प्लांट इन दोनों से बड़ा होगा। 
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यहां रोजाना 300 मीट्रिक टन वनस्पति कचरे को संसाधित किया जाएगा। इन सभी संयंत्रों को निगम सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत स्थापित      कर रहा है। 

जैविक कचरे से इस तरह बनती है बायो सीएनजी
बायो सीएनजी प्लांट में सबसे पहले वनस्पति कचरे को गलाकर बायो गैस बनाई जाती है। यदि इसमें हाइड्रोजन सल्फाइड की मात्रा 1500 पार्ट्स पर मिलियन से अधिक होती है तो गैस में से सल्फर को अलग किया जाता है। इसके बाद गैस को सीएनजी के लिए उपयुक्त बनाने के लिए इसे अपग्रेड किया जाता है।

बायो सीएनजी में 92 से 98 फीसदी मीथेन व दो फीसदी कार्बन डाइऑक्साइड होती है, जबकि बायो गैस में 55 से 65 फीसदी मीथेन और 34 से 45 फीसदी कार्बन डाइऑक्साइड होती है। बायो-सीएनजी की कैलोरिफिक मात्रा 52 हजार किलो होती है। यह बायो गैस से करीब 167 फीसदी ज्यादा है। बायो-सीएनजी में मीथेन और कैलोरिफिक मात्रा अधिक व नमी कम होने से यह वाहनों के ईंधन के लिए उपयुक्त हो जाती है। इसका इस्तेमाल भोजन पकाने के लिए पीएनजी के रूप में भी किया जा सकता है।

16 नए एसटीपी स्थापित करेगी निगम
एमसीडी अगले पांच साल में सात करोड़ की लागत से 16 नए सीवर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करेगी। निगम के पास मौजूदा समय 15 एसटीपी काम कर रहे हैं। एमसीडी ने योजना बनाई है कि इन सारे एसटीपी के माध्यम से सीवर के पानी को शोधित करने के बाद सीधे पार्कों में पौधों की सिंचाई के लिए सप्लाई कर दिया जाएगा। धूल कण खत्म करने के लिए भी पानी का इस्तेमाल होगा।

अन्य कचरे का ऐसे हो रहा निपटान 
nवर्तमान में दिल्ली के 73 मॉडल वार्डों में 80-100 फीसदी वेस्ट सेग्रीगेशन (रीसाइक्लिंग) किया जा रहा।
nअन्य वार्डों में 20-60 फीसदी वेस्ट सेग्रीगेशन किया जा रहा।
nप्लास्टिक कचरे के निपटान के लिए द्वारका में प्रतिदिन पांच टन, रघुबीर नगर में 15 टन प्रतिदिन और गीता कॉलोनी, पटपड़गंज, सीमापुरी, दिलशाद गार्डन व जखीरा में संयंत्र लगा है। 
nई-वेस्ट के लिए टोल फ्री नंबर उपलब्ध कराया है, एमसीडी के साथ मिलकर निजी एजेंसियां घर से ये कचरा ले रही हैं।

मीट्रिक टन कचरा राेजाना निकलता है 
दिल्ली में मौजूदा समय रोजाना 11,000 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इनमें से अधिकतर सूखा कचरा अभी दिल्ली की तीन लैंडफिल साइटों पर ही जाता है, जबकि रोजाना 20 मीट्रिक टन घरेलू हरित कचरे को दिल्ली में स्थापित कुल 20 कंपोस्टिंग मशीनों पर भेजा जा रहा है। निगम ने दिल्लीभर में 533 छोटे कंपोस्टर लगाए हैं। यहां पर रोजाना 538 टन गीले कचरे का निस्तारण किया जाता है।

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