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सवाल: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकारा, पूछा- ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स की एमआरपी तय क्यों नहीं?

Mon, 17 May 2021 11:13 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

अदालत ने केंद्र सरकार द्वारा कीमतों को तय करने में असमर्थता जताने पर यह निर्देश दिया। न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने कहा कि हम सरकार को इसका मूल्य रुपये या पैसे में तय नहीं करने के लिए कह रहे हैं, बल्कि एक सिद्धांत तय करने के लिए कह रहे हैं जिस पर आक्सीजन कंसंट्रेटर बेचे जाएंगे। 
 
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फाइल फोटो
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विस्तार
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उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि वह आक्सीजन कंसंट्रेटर का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) निर्धारित करने के लिए एक फार्मूला क्यों नहीं बना सकती। अदालत ने कहा कि कोरोना संक्रमण के इलाज में व्यापक तौर पर इस्तेमाल होने वाले आक्सीजन कंसंट्रेटर का मूल्य तय नहीं होने से लोगों से इसकी अत्याधिक राशि वसूली जा रही है। 
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अदालत ने केंद्र सरकार द्वारा कीमतों को तय करने में असमर्थता जताने पर यह निर्देश दिया। न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने कहा कि हम सरकार को इसका मूल्य रुपये या पैसे में तय नहीं करने के लिए कह रहे हैं, बल्कि एक सिद्धांत तय करने के लिए कह रहे हैं जिस पर आक्सीजन कंसंट्रेटर बेचे जाएंगे। 

पीठ ने कहा कि सरकर को यह समझना चाहिए कि यदि वह कोरोना महामारी जैसे एक असाधारण परिस्थिति में हस्तक्षेप नहीं करेंगे तो कब करेंगे। उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी भी उत्पाद की कीमत की सीमा होनी चाहिए, क्योंकि किसी भी चीज की कीमत असीमित नहीं हो सकती। 
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अदालत ने सवाल उठाया कि कल कोई चीनी निर्माता कंपनी कहेगी कि वह इसे 5 गुणा कीमत पर बेचेगी तो क्या हम इसकी अनुमति देंगे, उपभोक्ताओं व मरीजों के हित में अनुमति नहीं दी जा सकती। उच्च न्यायालय ने सख्त लहजे में कहा कि एक सरकार के तौर पर यह आपकी जिम्मेदारी है कि यह तय किया जाए कि लोग वास्तव में उत्पाद का खर्च उठाने में सक्षम हों और उन्हें अपनी नाक से ज्यादा यानी काफी अधिक कीमत का भुगतान नहीं करना पड़े। 
 
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पीठ ने कहा कि कंपनियों को लोगों के मजबूरी का फायदा नहीं उठाने दिया जा सकता है। पीठ ने सरकार से कहा कि क्या आपको उपभोक्ता के बारे में नहीं सोचना चाहिए। अदालत ने केंद्र से पूछा कि सरकार कीमत निर्धारित करने के लिए एक फॉर्मूला क्यों नहीं बना सकती। पीठ ने कहा कि सरकार यह नहीं कह सकती कि कंसंट्रेटर की मांग अधिक है और आपूर्ति कम है, ऐसे में वह कुछ नहीं कर सकती। 

पीठ ने सरकार से कहा कि यह कोई जवाब नहीं है, आपको इसे ठीक करना होगा। साथ ही सुझाव दिया कि कीमत तय करते वक्त उत्पाद की कीमत और जीएसटी और 15 फीसदी लाभ मार्जिन जैसे फार्मूला तैयार किया जा सकता है।

खंडपीठ ने कहा कि सिर्फ मांग और आपूर्ति किसी वस्तु का कीमत तय करने के लिए मानदंड नहीं हो सकते और सरकारी हस्तक्षेप और कीमत पर एक सीमा होनी चाहिए। पीठ ने यह टिप्पणी तब की जब सरकार की ओर से अधिवक्ता कीर्तिमान सिंह और अमित महाजन ने कहा कि जमीन कंसंट्रेटर की कीमत अंतत: निर्यातक द्वारा निर्धारित की जाती है। केंद्र ने पीठ को बताया कि आक्सीजन कंसंट्रेटर की कीमत तय करना उसके लिए संभव नहीं है क्योंकि बाजार में अलग-अलग कीमतों, आकारों और नामों के साथ अलग-अलग कंसंट्रेटर मौजूद है।

अदालत ने केंद्र सरकार को बुधवार को इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देने को कहा है। अधिवक्ता संजीव सागर व अन्य ने उच्च न्यायालय ने कोरोना महामारी के मद्देनजर आक्सीजन कंसंट्रेटर की हो रही कालाबाजारी के मद्देनजर इसकी कीमत तय करने की मांग की है।
 
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