दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक ‘सीरियल लिटिगेंट’ पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। यह व्यक्ति राष्ट्रीय राजधानी में संपत्तियों के गैरकानूनी निर्माण के खिलाफ कई याचिकाएं दायर कर चुका था, लेकिन बाद में उन्हें आगे नहीं बढ़ाया। यह मामला तब सामने आया जब जस्टिस मिनी पुष्करना आरके पुरम क्षेत्र में संपत्ति के गैरकानूनी निर्माण के खिलाफ उसी याचिकाकर्ता द्वारा दायर पांचवीं रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थीं। उन्होंने नोट किया कि याचिकाकर्ता बार-बार याचिकाएं दायर कर रहा है, लेकिन उन्हें आगे नहीं बढ़ा रहा।
दो दिसंबर के आदेश में कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता एक सीरियल लिटिगेंट है और उसने उक्त क्षेत्र में स्थित कई संपत्तियों के खिलाफ विभिन्न रिट याचिकाएं दायर की हैं। याचिकाएं दायर करने के बाद याचिकाकर्ता उन्हें आगे नहीं बढ़ा रहा। पूर्व के आदेशों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि कई बार स्पष्ट किया जा चुका है कि कोई भी व्यक्ति 'छिपे हुए उद्देश्यों' के लिए कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं कर सकता।
जस्टिस ने कहा कि याचिकाकर्ता का याचिकाएं दायर करना और उन्हें आगे न बढ़ाना, विश्वास को बढ़ावा नहीं देता और स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि याचिकाएं स्वार्थी और असंगत उद्देश्यों के लिए दायर की गई हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाएं केवल उचित और नेक इरादे से दायर की जानी चाहिए और किसी छिपे हुए स्वार्थ के लिए नहीं।
जस्टिस ने कहा कि यह कोर्ट किसी भी याचिका को स्वीकार नहीं करेगी, जो बाहरी या स्वार्थपूर्ण उद्देश्यों के लिए दायर की गई हो। स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता का उद्देश्य नेक नहीं लगता और याचिकाएं छिपे हुए उद्देश्यों के साथ दायर की गई हैं। कोर्ट ने कई बार कहा है कि कोई भी पार्टी कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं कर सकती।
दिल्ली नगर निगम (MCD) के वकील ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता ने इस साल अप्रैल और मई के बीच कुल चार रिट याचिकाएं दायर की थीं। याचिकाकर्ता के वकील के द्वारा याचिका वापस लेने के अनुरोध पर, कोर्ट ने 50 हजार रुपये का दंडात्मक जुर्माना लगाया और इसे चार हफ्तों के भीतर जमा करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम को कथित गैरकानूनी निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया। एमसीडी के वकील ने कोर्ट को बताया कि वह पहले ही इस मामले की जांच कर रही है।
क्या होता है सीरियल लिटिगेंट
‘सीरियल लिटिगेंट’ का मतलब है ऐसा व्यक्ति जो बार-बार अदालत में याचिकाएं या मुकदमे दायर करता है, लेकिन उन्हें आगे बढ़ाने या सच्चाई तक पहुंचाने में गंभीर नहीं होता। आसान शब्दों में, यह कोई ऐसा व्यक्ति है जो कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करता है। बार-बार शिकायतें, रिट या केस दायर करता है, अक्सर बिना सही कारण या नेक इरादे के, सिर्फ समय बर्बाद करने, परेशान करने या अपने निजी स्वार्थ के लिए। दिल्ली हाईकोर्ट के मामले में भी याचिकाकर्ता ने कई बार गैरकानूनी निर्माण के खिलाफ याचिकाएं दायर कीं, लेकिन उन्हें आगे नहीं बढ़ाया, इसलिए उन्हें ‘सीरियल लिटिगेंट’ कहा गया।