एक बार कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद किसी भी नागरिक का दोबारा आरटी-पीसीआर टेस्ट नहीं कराने को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने संज्ञान लिया। अदालत ने इस मामले में मंगलवार (1 जून) को केंद्र सरकार, आईसीएमआर और दिल्ली सरकार को नोटिस भेजा। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की बेंच ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, आईसीएमआर और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा। इस मामले में अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी।
गौरतलब है कि आईसीएमआर ने 4 मई 2021 को एक एडवायजरी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि किसी भी व्यक्ति का दोबारा आरटी-पीसीआर टेस्ट करने की जरूरत नहीं है। इसके बाद एडवोकेट करन आहूजा ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर करके मामले पर संज्ञान लेने का अनुरोध किया। याचिका में करन ने कहा कि उनके माता-पिता 28 अप्रैल को कोरोना संक्रमित हो गए थे। इसके बाद दिल्ली सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के तहत उन्हें 17 दिन तक होम आइसोलेशन में रखा गया। आहूजा की ओर से एडवोकेट कुलदीप जौहरी, एडवोकेट अनुभव त्यागी और एडवोकेट रजत भाटिया मामले की पैरवी कर रहे हैं।
करन ने अदालत को बताया कि इस दौरान उनके घर के बाहर सिविल डिफेंस के कर्मचारी तैनात कर दिए गए। उन सुरक्षाकर्मियों ने करन व उनके परिजनों को जरूरी सामान खरीदने के लिए भी घर से बाहर नहीं जाने दिया। इसके लिए कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट मांगी गई। ऐसे में करन और उनके माता-पिता 18 मई को सुल्तानपुरी स्थित नजदीकी डिस्पेंसरी गए, जहां काउंटर पर मौजूद मेडिकल स्टाफ ने उनका कोरोना टेस्ट करने से साफ इनकार कर दिया। मेडिकल स्टाफ का कहना था कि उन्हें आदेश मिले हैं कि उन लोगों के दोबारा टेस्ट न किए जाएं, जो संक्रमित हो चुके हैं।
एडवोकेट करन आहूजा का कहना है कि इस तरह कोरोना टेस्ट करने से इनकार करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 के तहत निहित उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। डिस्पेंसरी ने टेस्ट से इनकार के पीछे आईसीएमआर की ओर से 4 मई को जारी आदेश का हवाला दिया। इस आदेश में कहा गया है कि उन व्यक्तियों का आरटी-पीसीआर टेस्ट दोबारा न किया जाए, जो एंटीजन या आरटी-पीसीआर टेस्ट में एक बार संक्रमित पाए जा चुके हैं।
आहूजा का कहना है कि चार मई को आईसीएमआर की ओर से जारी की गई एडवायजरी मनमानी, भेदभावपूर्ण और एक विरोधाभासी स्थिति पैदा करती है, क्योंकि प्रतिवादियों (केंद्र, आईसीएमआर और दिल्ली सरकार) द्वारा जारी कई अन्य अधिसूचनाओं में निगेटिव आरटीपीसीआर रिपोर्ट को अनिवार्य किया गया है। याचिकाकर्ता ने अपनी और अपने परिवार के सदस्यों की दोबारा जांच कराने की अनुमति देने का अनुरोध भी किया।