दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ट्रांसजेंडर महिला की याचिका पर बुधवार को सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि जेंडर की सर्जरी कराने का विकल्प चुनने वाले ट्रांसजेंडरों को नया पासपोर्ट हासिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस मुद्दे को सुव्यवस्थित करने की जरूरत है।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने एक ट्रांसजेंडर महिला की याचिका पर सुनवाई की। महिला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अधिकारियों को नए नाम और लिंग सहित संशोधित विवरणों के साथ उसका पासपोर्ट फिर से जारी करने का निर्देश देने की मांग की है। क्योंकि सर्जरी कराने के बाद उनकी शक्ल बदल गई है। होईकोर्ट ने कहा कि कई मामलों में इसी तरह की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। ये लोग अपना लिंग बदलने के बाद पासपोर्ट की कमी के कारण पीड़ित हैं। इसे कुछ सुव्यवस्थित करने की जरूरत है।
ट्रांसजेंडर महिला याचिकाकर्ता ने याचिका में बताया कि वह जन्म से पुरुष थींष लेकिन रोजगार हासिल करने के बाद 2018 में अमेरिका चली गई और 2016 और 2022 के बीच पुरुष से महिला बन गईं। जिसके बाद वह कानूनी तौर पर नाम और लिंग में बदलाव कराने में योग्य हैं।