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दिल्ली सरकार ने केंद्र से मांगा केंद्रीय करों से अपना हिस्सा, सिसोदिया ने वित्त मंत्री की बैठक में रखी अपनी दलील

Mon, 18 Jan 2021 11:39 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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मनीष सिसोदिया - फोटो : एएनआई
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उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एक बार फिर केंद्रीय वित्तमंत्री से केंद्रीय करों में दिल्ली का वाजिब हिस्सा मांगा है। मनीष सिसोदिया की दलील है कि केंद्र शासित राज्यों को केंद्रीय सहायता और आपदा प्रबंधन कोष में जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर दिल्ली को वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए। 
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सिसोदिया ने केंद्रीय वित्त मंत्री की तरफ से 2021-22 के बजट पर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वित्तमंत्रियों के साथ बजट पूर्व बैठक में अपनी इस  मांग का दोहराया है। मनीष सिसोदिया ने कहा कि 2001-02 से लेकर अब तक बीस साल में केंद्रीय करों में दिल्ली का हिस्सा मात्र 325.00 करोड़ रूपये पर सीमित रखा गया है। 

दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र होने के साथ ही यहां विधान सभा भी है। लेकिन केंद्रीय वित्त आयोग के टर्म ऑफ रिफ्रेंस में दिल्ली को शामिल नहीं किया गया है। इसे केंद्रीय करों में मात्र 325.00 करोड़ रूपयों का तदर्थ अनुदान मिलता है।
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मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली में शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, परिवहन, सड़क और अस्पताल आदि में काफी निवेश की आवश्यकता है। विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्रीय करों में दिल्ली को अपना वैध हिस्सा पाने का पूरा हक है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि नियमानुसार वित्तवर्ष 2020-21 में 8150.00 करोड़ रुपये और वित्तवर्ष 2021-22 में 8555.00 करोड़ रुपये का आवंटन दिल्ली के लिए किया जाना चाहिए।
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उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में पांच शहरी स्थानीय निकाय हैं। इनमें तीन बड़े नगर निगम हैं, जिनकी आबादी 39 लाख से 62 लाख के बीच है। दिल्ली में नगरपालिकाओं की शक्तियां और कार्य अन्य राज्यों में स्थानीय निकायों के समान हैं। दिल्ली के नगर निकायों की चूक के तकनीकी आधारों पर इन्हें बेसिक और परफोर्मेंस ग्रांट से वंचित करना स्थानीय स्वायत्त निकायों को मजबूत करने की संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। 

दूसरी  तरफ दिल्ली के तीनों नगर निगम गंभीर आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं और अन्य राज्यों के नगर निकायों की तरह इन्हें भी केंद्रीय सरकार से वित्तीय सहायता पाने का पूरा हक है। दिल्ली वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप दिल्ली राज्य सरकार अपनी शुद्ध कर आय का 12.5 प्रतिशत हिस्सा दिल्ली नगर निगमों को देती है।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि 14वें वित्त आयोग ने वर्ष 2015-20 की अवधि में स्थानीय निकायों के लिए  2,87,436 करोड़ रुपये अनुदान का प्रावधान किया है। इस आधार पर हर नगर निकाय को प्रति-व्यक्ति, प्रति-वर्ष 488 रुपये मिलने चाहिए। दिल्ली की आबादी 193.86 लाख होने के कारण दिल्ली नगर निकायों को कम-से-कम 1150.00 करोड़ रुपये अनुदान के साथ ही उचित वार्षिक वृद्धि का लाभ मिलना चाहिए।

सिसोदिया ने केंद्रीय वित्त मंत्री को बताया कि दिल्ली को वर्ष 2000-01 में केंद्रीय सहायता के रूप में 370 करोड़ मिले थे जबकि वर्ष 2020-21 में मात्र 626 करोड़ रुपये मिले हैं। वर्ष 2000-01 में सामान्य केंद्रीय सहायता कुल व्यय का 5.14 प्रतिशत थी। यह वर्ष 2020-21 में घटकर मात्र 0.96 प्रतिशत रह गई है। सिसोदिया ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण वित्तवर्ष 2020-21 के दौरान राजस्व संग्रह में 42 फीसदी की अभूतपूर्व कमी आई है। इस तथ्य के मद्देनजर भारत सरकार को दिल्ली के लिए अतिरिक्त सहायता देने पर भी विचार करना चाहिए।
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